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Jharkhand Politics : निर्वाचन आयोग पर JMM का हमला, ये क्या बोल गए पार्टी के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य

Jharkhand Politics : झामुमो नेता ने निर्वाचन आयोग की सोशल मीडिया पोस्ट की भाषा पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि यह किसी संवैधानिक संस्था के अनुरूप नहीं है।

by Mujtaba Haider Rizvi
JMM leader Suprio Bhattacharya
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Ranchi : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भारत निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि आयोग पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रहा है।
27 लाख वोटरों के नाम हटाने पर विवाद

सुप्रियो भट्टाचार्य ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में लगभग 27 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ लोगों का मताधिकार प्रभावित हुआ है, बल्कि उनकी नागरिकता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

उन्होंने यह भी पूछा कि क्या आम लोग ट्रिब्यूनल के चक्कर काटकर अपने अधिकार बचा पाएंगे। राज्य में बने 19 ट्रिब्यूनल पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि क्या लोगों को सैकड़ों किलोमीटर दूर जाकर अपनी भारतीयता साबित करनी होगी।

आयोग की कार्यशैली पर भी उठाए सवाल

झामुमो नेता ने निर्वाचन आयोग की सोशल मीडिया पोस्ट की भाषा पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि यह किसी संवैधानिक संस्था के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग अब राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने कहा कि “ऐसा लगता है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा को जीत दिलाने का ठेका ले लिया गया है।”

असम का उदाहरण देकर उठाए सवाल

सुप्रियो भट्टाचार्य ने असम का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां इस तरह की प्रक्रिया की सबसे ज्यादा जरूरत थी, वहां आयोग ने ऐसा नहीं किया। इससे आयोग की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, पश्चिम बंगाल में Special Intensive Revision (SIR) के तहत 90 लाख से अधिक नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इनमें से 60 लाख मामलों की जांच के बाद 27.16 लाख लोगों को अयोग्य पाया गया।

आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया डुप्लिकेट, मृत, स्थानांतरित या अयोग्य मतदाताओं को हटाने के लिए की गई है। हालांकि विपक्ष इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बता रहा है।

लोकतंत्र पर खतरे की चेतावनी

सुप्रियो भट्टाचार्य ने इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताते हुए कहा कि अब सवाल यह है कि क्या देश में लोकतंत्र सुरक्षित है और क्या लोग अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा कर पाएंगे। उन्होंने जनता से सतर्क रहने की अपील की।

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