RANCHI: झारखंड में स्क्वैश खेल का दायरा बढ़ रहा है। झारखंड के खिलाड़ी नेशनल खेलने भी जा रहे है। लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में इस खेल के खिलाड़ी परेशानी का सामना कर रहे हैं। राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले स्क्वैश खिलाड़ियों को आज भी एक स्थाई कोर्ट का इंतजार हैं। स्क्वैश खिलाड़ियों का कोर्ट नहीं होने के कारण रेगुलर प्रैक्टिस प्रभावित हो रही है। जिसका सीधा असर उनके प्रदर्शन और भविष्य पर पड़ रहा है। बता दें कि एक साल पहले इस कोर्ट के निर्माण के लिए 2 करोड़ 84 लाख 84 हजार 705 सैंक्शन किए गए है। इसके बावजूद स्क्वैश कोर्ट फाइलों में ही घूम रहा है।
मोरहाबादी में बनना था कोर्ट
जानकारी के अनुसार मोरहाबादी स्थित इंडोर बैडमिंटन कैंपस में ही स्क्वैश के लिए चार कोर्ट बनाने का प्रस्ताव पहले रखा गया था। इस प्रस्ताव को खेल विभाग को भेजा गया। खिलाड़ियों को उम्मीद थी कि अब एक स्क्वैश कोर्ट बनकर तैयार होगा। लेकिन अब तक यह योजना केवल फाइलों तक ही सीमित है। परिणाम यह है कि राज्य के अच्छे खिलाड़ी बिना प्रैक्टिस के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी करने को मजबूर हैं।
प्राइवेट में प्रैक्टिस पड़ रहा महंगा
कोर्ट की कमी के कारण खिलाड़ी प्राइवेट स्क्वैश कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं। जहां एक-एक खिलाड़ी से हर महीने लगभग 20 हजार रुपये तक चार्ज लिया जा रहा है। ऐसे में खिलाड़ियों के लिए ये बड़ी चुनौती बन गई है। कई खिलाड़ी आर्थिक कारणों से रेगुलर प्रैक्टिस नहीं कर पा रहे है। इस चक्कर में खिलाड़ी परेशान है कि कहीं इसका असर उनके परफार्मेंस पर न दिखने लगे।
नेशनल में कर चुके है परफार्म
नाम न छापने की शर्त पर खिलाड़ियों ने बताया कि झारखंड से कई स्क्वैश खिलाड़ी नेशनल लेवल पर शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं। भविष्य में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी राज्य का नाम रोशन कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए उन्हें सही संसाधन उपलब्ध कराने की जरूरत है। दो साल बाद ओलंपिक होना है। जिसमें खिलाड़ी पार्टिसिपेट कर सकते है। ऐसे में यह समय खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा और प्रशिक्षण देने का है। जिससे कि वे देश के लिए मेडल भी जीत सकते है। वहीं एक्सपर्ट्स का मानना है कि समय रहते मोरहाबादी इंडोर कैंपस में प्रस्तावित स्क्वैश कोर्ट का निर्माण हो जाए तो इस क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है। खिलाड़ियों ने राज्य सरकार और खेल विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द कोर्ट निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए।
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