Ranchi: लंदन में गुरुवार को झारखंड और यूके का राउंड टेबल संवाद हुआ। इसमें अबुआ सरकार के मंत्री व अधिकारियों और यूके के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, कौशल विकास से जुड़े संगठनों, अवॉर्डिंग बॉडीज और अप्रेंटिस पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मीटिंग की अध्यक्षता पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और अपर मुख्य सचिव वंदना डाडेल की। इस संवाद का मकसद झारखंड के युवाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण देना और अंतरराष्ट्रीय अवसरों से जोड़ने की रणनीति तैयार करना था।
इस मौके पर पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि यह संवाद अबुआ सरकार की उस सोच को मजबूती प्रदान कर रहा है, जिसमें यह रणनीति तैयार हो रही है कि शिक्षा को रोजगार से, कौशल को अवसर से और स्थानीय झारखंडी प्रतिभा को वैश्विक मंच से जोड़ा जाए।
झारखंड में यूके की युनिवर्सिटीज को आमंत्रण
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मार्गदर्शन में अबुआ सरकार युवा शक्ति को भविष्य के लिए तैयार करने की रणनीति बना रही है। सत्र के उद्घाटन में झारखंड के प्रतिनिधिमंडल ने अपने प्रदेश को एक भौगोलिक इकाई नहीं बल्कि वैश्विक शिक्षा और नवाचार के संभावित केंद्र के तौर पर पेश किया और यूके के विश्वविद्यालय व अन्य शैक्षिक संगठनों को झारखंड में शाखाएं खोलने को आमंत्रित किया है। प्रतिनिधिमंडल ने संवाद में इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों की गतिविधियां खास तौर से पश्चिम भारत, दिल्ली एनसीआर और दक्षिण भारत तक सीमित हैं। पूर्वी और मध्य भारत इससे अछूता रहा है। अब जरूरत है कि अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटीज पूर्वी भारत के प्रदेशों जैसे झारखंड में अपनी मौजूदगी दर्ज करें।
उच्च शिक्षा के तीन स्तंभों पर ज़ोर
प्रतिनिधि मंडल ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधार के तीन स्तंभ पर जोर दिया। इसमें राज्य संकाय विकास अकादमी की स्थापना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप अनिवार्य 8 सप्ताह की इंटर्नशिप और राष्ट्रीय बेंच मार्किंग के अनुरूप राज्य संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क। सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि उच्च शिक्षा में लैंगिक समानता सूचकांक के मामले में झारखंड राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। विदेशी छात्रवृत्ति प्रकार यूके जाने वाले स्टूडेंट्स में अधिकतर महिलाएं हैं।
इन बिंदुओं पर भी मंथन
संवाद में अप्रेंटिस, शिफ्ट आधारित शिक्षा, उद्योग, संबद्ध डिग्री कार्यक्रम और आईटीआई पाठ्यक्रमों के आधुनिकीकरण पर भी मंथन किया गया। केयर इकोनामी, पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी, हरित कौशल, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और खनन से जुड़े अनुसंधान को प्राथमिकता बताया गया। इन सब बिंदुओं पर यूके के प्रतिभागियों ने झारखंड के दृष्टिकोण की सराहना की और यह इच्छा जताई कि ट्रांसनेशनल एजुकेशन पाठ्यक्रम, विकास, शिक्षण- प्रशिक्षण, अनुसंधान और व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में यूके के विश्वविद्यालय सहयोग करेंगे।

