
कार्मिक विभाग की ओर से जारी किया गया निलंबन संबंधी संकल्प
19 अगस्त को सीआईडी ने किया था अरेस्ट, गिरफ्तारी की तिथि से ही प्रभावी होगा निलंबन
सफल अभ्यर्थियों, पुलिसकर्मियों और निजी एजेंसी के कर्मचारियों पर भी हुई कार्रवाई
परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए अनुचित तरीके का किया गया था इस्तेमाल
कर्मचारी चयन आयोग के अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही सीआईडी
Ranchi : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितता के मामले में राज्य सरकार ने गिरफ्तार नवनियुक्त सहायक प्रशाखा पदाधिकारी सुषमा कुमारी को निलंबित कर दिया है। सीआईडी ने उन्हें 19 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा था। सरकार ने उनकी गिरफ्तारी की तिथि से ही निलंबन प्रभावी किया है। इस संबंध में कार्मिक विभाग ने संकल्प जारी किया है।
सुषमा कुमारी इस मामले के प्रमुख आरोपी अभय कुमार तिवारी की पत्नी हैं। सीआईडी की जांच में अभय तिवारी के साथ उसकी पत्नी और भाई अक्षय तिवारी की भूमिका भी सामने आने के बाद तीनों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। जांच एजेंसी को संदेह है कि परीक्षा में अनुचित तरीके से सफलता हासिल करने के लिए अभ्यर्थियों को पहले से प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया था।
जेल में रहने के कारण निलंबन
विभागीय संकल्प के अनुसार, सीआईडी ने सुषमा कुमारी की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की सूचना विभाग को दी थी। इसके बाद झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2016 के नियम 9(2)(क) के तहत निलंबित करने का निर्णय लिया गया। निलंबन अवधि में मुख्यालय मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग के निगरानी प्रभाग में निर्धारित किया गया है। इस दौरान नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। सात अक्टूबर को जारी संकल्प को सर्वसाधारण की जानकारी के लिए प्रकाशित किया गया है।
अब तक 36 आरोपियों की गिरफ्तारी
जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितता की जांच के दौरान सीआईडी ने सफल अभ्यर्थियों, कथित एजेंटों, पुलिसकर्मियों और परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। मिली जानकारी अनुसार इस मामले में 36 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें परीक्षा में सफल हुए कुछ अभ्यर्थी और कथित पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े लोग भी शामिल हैं। जांच के दौरान परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी आईसीएन के दो कर्मचारियों को भी गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा झारखंड पुलिस के कुछ जवानों की गिरफ्तारी भी हुई थी। जांच एजेंसी कथित तौर पर अभ्यर्थियों को प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराने और इसके बदले पैसे के लेन-देन से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर आयोग और परीक्षा संचालन से जुड़ी व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। जांच एजेंसी ने सफल अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड का सत्यापन करने के साथ संदिग्धों से पूछताछ की है

