
खूंटी : खूंटी-तोरपा मुख्य मार्ग पर पेलोल के समीप बनई नदी पर स्थित पुल टूटे एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक इसके पुनर्निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो सका है। पिछले वर्ष 19 जून 2025 को भारी बारिश के दौरान पुल का मध्य हिस्सा ध्वस्त हो गया था। तब से इस मार्ग पर आवागमन अस्थायी डायवर्सन के सहारे हो रहा है। मानसून की दस्तक के साथ ही स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि नदी का जलस्तर बढ़ने पर यह डायवर्सन कभी भी बह सकता है।
एक साल बाद भी शुरू नहीं हुआ पुल निर्माण
पथ निर्माण विभाग ने पुल निर्माण के लिए टेंडर और लागत विवरण की प्रक्रिया पूरी कर ली है। करीब सात करोड़ रुपये की प्राक्कलित राशि भी स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना विभागीय प्रक्रियाओं में फंसी हुई है। उनका कहना है कि बार-बार मांग करने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
मानसून में बढ़ा आवागमन बाधित होने का खतरा
स्थानीय लोगों के अनुसार, बनई नदी में जलस्तर बढ़ने या तेज बहाव की स्थिति में अस्थायी डायवर्सन बह सकता है। यदि ऐसा हुआ तो तोरपा और रनिया प्रखंड के 100 से अधिक गांवों का जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क टूट जाएगा।
इसका सबसे अधिक असर मरीजों, स्कूली बच्चों, किसानों, व्यापारियों और दैनिक आवागमन करने वाले लोगों पर पड़ेगा।
कई जिलों और ओडिशा को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग
खूंटी-तोरपा मार्ग केवल स्थानीय यातायात के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह तोरपा, तपकरा, बसिया, सिमडेगा, कोलेबिरा और मनोहरपुर को ओडिशा से जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग भी है।
प्रतिदिन इस सड़क से सैकड़ों छोटे और बड़े वाहन गुजरते हैं। पुल नहीं बनने से इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवागमन प्रभावित होने की आशंका लगातार बनी हुई है।
अंगराबारी मेले पर भी मंडरा रहा संकट
सावन माह में झारखंड के प्रसिद्ध बाबा आमरेश्वर धाम अंगराबारी में एक माह तक विशाल धार्मिक मेला आयोजित होता है। इस मेले में झारखंड के अलावा बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
पिछले वर्ष पुल टूटने के कारण श्रद्धालुओं को 15 से 20 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ी थी। इस वर्ष भी यदि पुल का निर्माण समय पर पूरा नहीं हुआ तो श्रद्धालुओं को एक बार फिर लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ सकता है, जिससे मेले की व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है।
जनप्रतिनिधियों की मांग के बावजूद नहीं शुरू हुआ काम
स्थानीय सांसद कालीचरण मुंडा और तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया सहित कई जनप्रतिनिधियों ने विभागीय मंत्री और अधिकारियों से पुल निर्माण शीघ्र शुरू कराने की मांग की थी। हालांकि अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर पहल की जाती तो एक वर्ष के भीतर नया पुल तैयार हो सकता था। उन्होंने चेतावनी दी है कि जल्द काम शुरू नहीं होने पर आंदोलन किया जाएगा।
विभाग ने जल्द निर्माण शुरू कराने का दिया आश्वासन
पथ निर्माण विभाग के कनीय अभियंता अमित कुमार ने बताया कि पुल निर्माण के लिए टेंडर और लागत विवरण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। लगभग सात करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हो गई है और निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा।

