नई दिल्ली : भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, जिन्हें भारतीय अर्थव्यवस्था के सुधारक के रूप में जाना जाता है, का निधन गुरुवार रात दिल्ली में हो गया। उनके निधन पर देशभर के नेताओं, अधिकारियों और आम नागरिकों ने शोक व्यक्त किया। कांग्रेस नेता और उनके योगदानों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। इस बीच, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर डॉ. मनमोहन सिंह के साथ जुड़ी एक पुरानी याद ताजा की, जो उनके मानवीय दृष्टिकोण और राजनीति के प्रति उनके दृष्टिकोण को बयां करती है।
विरोधी पार्टी के मुख्यमंत्री के उपवास का किस्सा
शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पोस्ट में बताया कि एक बार वह मध्य प्रदेश में किसानों की समस्याओं को लेकर उपवास पर बैठे थे। यह उनके लिए एक संघर्ष था, लेकिन डॉ. मनमोहन सिंह का जो रुख था, वह अलग था। उन्होंने तुरंत फोन किया और शिवराज सिंह चौहान से उपवास तोड़ने की अपील की। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। इस घटना से स्पष्ट होता है कि डॉ. मनमोहन सिंह ने अपनी राजनीति में हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम किया और राज्यों की समस्याओं के समाधान में सहयोग देने के लिए तत्पर रहते थे।
मध्य प्रदेश की आपदा में डॉ. मनमोहन सिंह का योगदान
शिवराज सिंह चौहान ने अपने पोस्ट में एक और महत्वपूर्ण किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि 90 के दशक में मध्य प्रदेश में पाले की समस्या एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई थी। पहले इसे राष्ट्रीय आपदा नहीं माना जाता था, लेकिन शिवराज सिंह चौहान ने इस मुद्दे को डॉ. मनमोहन सिंह के समक्ष उठाया। इसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने एक समिति बनाई, जिसमें प्रणब मुखर्जी और शरद पवार जैसे दिग्गज नेता शामिल थे। इस समिति ने अंततः पाले को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया। शिवराज सिंह चौहान ने इस घटना को डॉ. मनमोहन सिंह की विजनरी राजनीति का उदाहरण बताया और कहा कि उनका व्यक्तित्व हमेशा प्रेरणादायक था।
मनमोहन सिंह की सादगी : एक बॉडीगार्ड की नजर से
इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण ने भी डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़ी अपनी यादें साझा की। असीम अरुण ने बताया कि वह 2004 से लगभग तीन वर्षों तक डॉ. मनमोहन सिंह के बॉडीगार्ड रहे थे। एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) के एक सदस्य के रूप में उन्हें प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी। असीम ने बताया कि डॉ. मनमोहन सिंह के पास हमेशा एक साधारण मारुति 800 कार थी, जबकि उनके काफिले में चमचमाती बीएमडब्ल्यू जैसी महंगी गाड़ियां भी होती थीं। जब भी काफिला गुजरता, डॉ. मनमोहन सिंह अपनी मारुति को बड़े प्यार से देखते, जैसे वह अपने मध्यवर्गीय जीवन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहरा रहे हों।
असीम अरुण ने बताया कि एक बार डॉ. मनमोहन सिंह ने उनसे कहा कि मुझे यह कार बहुत पसंद है, यह मेरी गड्डी है। यह सुनकर असीम ने उन्हें बताया कि यह गाड़ी सुरक्षा कारणों से एसपीजी द्वारा चुनी गई थी, लेकिन डॉ. मनमोहन सिंह का कहना था कि वह किसी ऐश्वर्य में नहीं, बल्कि एक आम आदमी की तरह अपनी जिम्मेदारियों को निभाना चाहते थे।
मनमोहन सिंह का राजनीतिक व्यक्तित्व
डॉ. मनमोहन सिंह का राजनीतिक जीवन और उनकी कार्यशैली आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। उनके नेतृत्व में भारत ने 1991 के आर्थिक संकट से उबरने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाए। उनका व्यक्तित्व इतना सरल और विनम्र था कि वह अपने विरोधियों को भी सम्मान देने में विश्वास रखते थे। डॉ. मनमोहन सिंह का यह दृष्टिकोण उन्हें एक विशेष स्थान दिलाता है।

