Jamshedpur : एमजीएम थाना क्षेत्र में पुलिस हिरासत के दौरान युवक की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस प्रकरण को लेकर जमशेदपुर के सांसद बिद्युत बरण महतो ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है। इस पूरे मामले में इतने सवाल हैं जिनका जवाब पुलिस नहीं दे पा रही है। पुलिस का कहना है कि जब उन्होंने जाना कि युवक गंभीर रूप से बीमार है, तो फौरन उसे पीआर बांड पर छोड़ दिया गया। उसके काफी देर बाद युवक की मौत हुई है। मगर, सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब युवक को पीआर बांड पर छोड़ दिया गया, तो उसे पुलिस एमजीएम अस्पताल भर्ती कराने कैसे पहुंच गई? अगर पूरे मामले की सीआईडी जांच ईमानदारी से कर दी जाए तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। इस मामले में सवाल यह भी है कि पुलिस ने युवक को चोरी का मोबाइल खरीदने के आरोप में किस दिन और कितने बजे उठाया? इसके बाद उसे थाने में किस दिन से किस दिन तक कितने घंटे रखा गया? पुलिस ने आनन-फानन में कागज पर जो पीआर बांड बनाया है वह किस दिन और कितने बजे बनाया? इसके बाद पुलिस ने युवक को कितने बजे एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया? युवक के परिजनों को कितने बजे अस्पताल आने को कहा गया? इन सब सवालों का जवाब जनता जानना चाहती है। लोगों को आशंका है कि पुलिस हिरासत में होने की वजह से जीत महतो का इलाज नहीं हो सका और इसी वजह से उसने दम तोड़ दिया। बाद में पुलिस ने परिजनों से लिखवा लिया था कि जीत महतो बीमार था।
बीमारी की दुहाई पर भी पुलिस ने नहीं खाया रहम
गौरतलब है कि एमजीएम थाना क्षेत्र के गोकुल नगर निवासी 22 वर्षीय जीत महतो ने चोरी का मोबाइल 500 रुपये में खरीदा था। पुलिस ने रविवार को भोर साढ़े तीन बजे या परिजनों के बयान के अनुसार रात करीब एक बजे छापामारी कर जीत महतो को उसके घर से गिरफ्तार किया था। परिजनों का कहना है कि गिरफ्तारी के समय परिवार के लोगों ने बताया था कि उनका बेटा बीमार है। इलाज चल रहा है। मगर, पुलिसकर्मी नहीं माने। बाद में सोमवार को जीत की मां कई बार थाने गई और बेटे की बीमारी की दुहाई देकर उसे छोड़ देने की विनती की थी। मगर, पुलिसकर्मी नहीं पसीजे। मृतक की पत्नी का कहना है कि जब जीत को पुलिस ले जा रही थी तो वह चल भी नहीं पा रहा था। पुलिसकर्मियों ने उसे भरोसा दिलाया था कि वह जीत का इलाज कराएंगे। मगर, ऐसा नहीं किया गया।
“मां मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा रहा है, घर ले चलो…”
सोमवार की सुबह जीत की मां थाने पहुंची थी। जीत की मां बताती हैं कि तब पुलिसकर्मियों ने उनसे कहा कि आज नहीं, कल यानी मंगलवार को छोड़ेंगे। मगर, तब भी जीत ने मां को बताया था, “मां मेरी आंखों के सामने अंधेरा सा छा रहा है, मां-हमें भी साथ ले चलो।” इस पर मृतक की मां ने पुलिस कर्मियों से फिर जीत को छोड़ देने की विनती की। मगर पुलिस कर्मियों को दया नहीं आई। जीत की मां बताती हैं कि एक पुलिसकर्मी ने उन्हें डपट कर कहा, “जाओ-जाओ- थाने का गेट दिख रहा है न, यहां बकवास करोगी। तेरा बच्चा चोरी का मोबाइल लेता है। बच्चे को समझाती नहीं हो।” इस पर युवक की मां ने फिर विनती की। वह बताती हैं कि जीत बहुत रो रहा था। पुलिस के इस जवाब के बाद वह घर लौट आईं।
…फिर पुलिस घर आई, जीत के पिता को ले गई
वह बताती है कि उसका मन बच्चे में ही लगा था। जीत की सूरत मां के सामने आ जाती थी। उनका मन नहीं मान रहा था। बाद में एक बार फिर वह थाने गईं तो वहां बताया गया कि उनके बेटे को एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जीत की पत्नी बताती हैं कि घर पर पुलिस की गाड़ी गई। पुलिस जीत के पिता को गाड़ी से एमजीएम अस्पताल ले गई। पुलिसकर्मी जीत के पिता को डांट रहे थे कि आठ दिन से युवक की तबीयत खराब है उसका इलाज क्यों नहीं कराया। जीत की पत्नी का कहना है कि वह लोग उसका इलाज पहले से ही करा रहे थे।
मंगलवार को दोपहर बाद करीब 3:15 बजे पुलिस जीत महतो को एमजीएम अस्पताल लेकर गई। उसके बाद सूचना मिलने पर परिजन भी वहां पहुंचे। परिजनों का कहना है कि जब वह वहां पहुंचे तो जीत महतो दम तोड़ चुका था। इससे जांच का एक पहलू यह भी आता है कि जीत महतो की मौत कहां हुई थी? ऐसा तो नहीं है कि जीत महतो की मौत थाने में ही हो गई हो? यह जांच के बाद सामने आएगा। एमजीएम थाना क्षेत्र के गोकुल नगर निवासी जीत महतो की हिरासत में मौत को लेकर परिजनों ने सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि मामले को दबाने के लिए थाना प्रभारी की ओर से दो लाख रुपये दिए गए। सांसद बिद्युत बरण महतो ने कहा कि यह स्वाभाविक मौत नहीं, बल्कि पुलिस प्रताड़ना का नतीजा है।
चोरी का मोबाइल खरीदने के संदेह में युवक पर ढाया गया कहर
घटना की जानकारी मिलते ही सांसद गोकुल नगर पहुंचे और मृतक के परिजनों से मुलाकात की। मृतक की मां पूजा महतो ने गिरफ्तारी से लेकर मौत तक की पूरी घटना का जो विवरण दिया, उसे सांसद ने बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि जीत महतो की गिरफ्तारी की प्रक्रिया ही कई गंभीर सवाल खड़े करती है। सांसद ने पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की जल्दबाजी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक छोटे मोबाइल को खरीदने पर पुलिस ने युवक को जबरन हिरासत में लिया, जहां बेरहमी से प्रताड़ित किया गया। हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। इसके बाद पूरे मामले को सामान्य दिखाने की कोशिश की गई।
किसकी अनुमति से दिए गए दो लाख रुपए?
दो लाख रुपये दिए जाने के आरोप पर सांसद ने कहा कि यह राशि किस मद से, किस अधिकारी की अनुमति से दी गई और क्या झारखंड में एक युवा की जान की कीमत सिर्फ दो लाख रुपये है? यह गंभीर जांच का विषय है। सांसद बिद्युत बरण महतो ने झारखंड के पुलिस महानिदेशक से मांग की कि जिम्मेदार सभी पुलिस पदाधिकारियों पर हत्या का मामला दर्ज किया जाए, उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित थाना प्रभारी का पूर्व रिकॉर्ड भी विवादों से जुड़ा रहा है।
उसी रात पैदा हुआ जीत का बेटा
जीत की मां ने बताया कि जब पुलिस जीत को घर से उठा कर ले गई थी तो उसकी पत्नी को गर्भवती हुए नौ माह पूरे हो चुके थे। जीत जब घर में था तो बोला करता था कि मां- जल्द ही बेटा पैदा होगा। जीत कहा करता था कि वह बेटे को गोद में लेकर घुमाएगा। वह काफी उत्साहित था। मगर, दुर्भाग्य जब पुलिस जीत को थाने ले कर चली गई तो बेटा पैदा हो गया। जीत अपने बच्चे का दीदार तक नहीं कर सका।
क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी
सांसद के आरोप पर एसपी ग्रामीण ऋषभ गर्ग का कहना है कि दो लाख रुपये किसने मृतक के परिजनों को दिए हैं। पुलिस ने तो नहीं दिए। यही नहीं, उन्होंने बताया कि युवक के साथ थाने में कोई मारपीट नहीं हुई। युवक पहले से ही बीमार था। पुलिस यह समझ नहीं पाई कि युवक की तबीयत खराब है वरना उसे नहीं लाती। पुलिस को जैसे ही परिजनों ने युवक की बीमारी के कागज दिखाए वैसे ही पुलिस ने उसे पीआर बांड पर छोड़ दिया। पीआर बांड पर छोड़े जाने के काफी देर बाद युवक की मौत हुई है। अमूमन ऐसा होता है कि जैसे ही आरोपी को पीआर बांड पर छोड़ा जाता है परिजन उसे घर लेकर चले जाते हैं। इस मामले में भी अगर ऐसा हुआ तो फिर युवक को पुलिस एमजीएम थाना भर्ती कराने कैसे लेकर गई। इस पर ग्रामीण एसपी का जवाब था कि पुलिस मानवीय आधार पर युवक को अस्पताल ले गई। उन्होंने बताया कि युवक को जैसे ही पीआर बांड पर छोड़ा गया वैसे ही उसे पुलिस अपनी गाड़ी में ले गई और अस्पताल में भर्ती कराया।
जीत महतो को था ब्रेन फीवर, प्लेटलेट्स भी कम
ग्रामीण एसपी ऋषभ गर्ग ने बताया कि डाक्टरों का कहना है कि युवक को ब्रेन फीवर था। इसके पहले रविवार को ही उसका ब्लड टेस्ट हुआ था। इस में रिपोर्ट आई थी कि जीत महतो के ब्लड में प्लेटलेट्स कम हैं। ग्रामीण एसपी के अनुसार जीत का लीवर पहले ही डैमेज हो चुका था। वह नशा भी करता था। यही नहीं, उसे ज्वाइंडिस बीमाी भी थी। पीएम रिपोर्ट में युवक के शरीर पर कोई मारपीट के कोई बाहरी निशान नहीं पाए गए हैं।

