- शहर के डाक्टर सौरभ बनर्जी को यूएसए के पेरी फौचार्ड अकादमी ने किया सम्मानित
- भारत सरकार ने भी सीएचएफ तकनीक को दी मान्यता, इस तकनीक के कई फायदे
जमशेदपुर : दांतों की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए एक अच्छी और राहतभरी खबर है। शहर के डाक्टर (माइक्रो-एंडोडोंटिस्ट) सौरभ बनर्जी ने एक नई तकनीक सीएचएफ (कन्सेप्चुअल हाइब्रिड प्लेयर) इजाद की है, जिसे भारत सरकार ने भी मान्यता दे दी है। यह उपलब्धि भारत ही नहीं बल्कि विदेशों के मरीजों को भी इसका लाभ मिल सकेगा। इसे देखते हुए रविवार को मध्यप्रदेश के इंदौर में यूएसए के पेरी फौचार्ड अकादमी की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में डा. सौरभ बनर्जी को हानरेरी फेलोशिप सम्मान दिया गया।

डा. सौरभ बनर्जी ने सीएचएफ तकनीक के बारे में समझाते हुए कहा कि इसे विकसित करने में करीब आठसाल लगे हैं। इस तकनीक में उपयोग होने वाला उपकरण स्टेनलेस स्टील व निकेल टाइटेनियम के मिश्रण से बना है। इस तकनीक के माध्यम से रूट कैनाल करने के तरीके को बदला गया है। पुरानी विधि में एक ही फाइल का उपयोग किया जाता है, जो दांतों की नली के अंतिम क्षोर तक जाता है, जिससे उपकरण टूट कर नली में फंसने का खतरा बना रहता है। नई तकनीक में ऐसा बिल्कुल नहीं है।
इसमें दांतों की घुमावदार नली को चिन्हित कर उसके अनुसार उसे अलग-अलगहिस्सों में बांट दिया जाता है। कई हिस्सों में बंटने से घुमावदार भाग छोटे हो जाते हैं, जिससे उपकरण टूटने की संभावना शून्य हो जाती है। सीएचएफ तकनीक में 10 स्टेप बनाए गए हैं, जिसका पालन करना होता है।
संक्रमण होने का खतरा भी नहीं
डा. सौरभ ने बताया कि अब रूट कैनाल कराते समय न तो फाइल (उपकरण) टूटने का डर होगा और न ही संक्रमण होना का खतरा। इतना ही नहीं, इलाज पर भी 33 प्रतिशत खर्च कम आएगा। इस तकनीक को भारत सरकार ने भी मान्यता दे दी है। ऐसे में अब दांत का इलाज सस्ता और बेहतर होगा। डा. सौरभ का दावा है कि देश में इस तरह की यह पहली तकनीक है। सीएचएफ तकनीक के कई फायदे हैं। इससे दांतों की उम्र बढ़ने के साथ-साथ रूट कैनाल की गुणवत्ता में भी काफी सुधार आएगा। उन्होंने कहा कि पारंपरिक पद्धति से रूट कैनाल करने के दौरान लगभग 10 प्रतिशत मरीजों के दांतों की नली में उपकरण टूट जाते हैं। इससे मरीज का समुचित इलाज नहीं हो पाता है और संक्रमण हो जाता है।
इससे मरीज को सर्जरी के बाद दोबारा दर्द सहित अन्य परेशानी शुरू हो जाती है लेकिन नई तकनीक में उपकरण टूटने की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में इलाज भी बेहतर होगा और दांतों की उम्र भी बढ़ेगी। चूंकि, इंफेक्शन अधिक होने की वजह से कई बार दांतों को निकालने की भी नौबत आ जाती है लेकिन नई तकनीक से इलाज पूर्ण होने से इंफेक्शन होने का खतरा ही नहीं रहेगा। ऐसे में दांतों को निकालने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी। इससे लोगों को काफी राहत मिलेगी।

