पटना : टॉय ट्रेन का नाम जेहन में आते ही दार्जिलिंग का ध्यान आता है। दार्जिलिंग घूमने का रोमांच टॉय ट्रेन के बिना अधूरा माना जाता है। अब नया साल 2024 के जश्न के बीच पटना वासियों और पर्यटकों के लिए एक शानदार खबर आई है। इस बार, दार्जिलिंग जाने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि पटना जू में नए साल के मौके पर टॉय ट्रेन का संचालन शुरू किया जा रहा है। इससे स्थानीय और अन्य राज्य के पर्यटकों को एक अद्भुत अनुभव मिलेगा।

पटना आनेवाले पर्यटकों के लिए सौगात
यह टॉय ट्रेन यात्रा पटना में एक नया आकर्षण बनेगी, जो लोगों को बिना दार्जिलिंग जाए एक जैसे रोमांच का अनुभव कराएगी। यह टॉय ट्रेन यात्रा पटना जू में टॉय ट्रेन के पुराने ट्रैक पर आधारित होगी। पटना जू में यह ट्रेन एक नई सौगात के रूप में सामने आएगी, जो खासतौर पर बच्चों और परिवारों के लिए रोमांचक अनुभव साबित होगी। वहीं पर्यटकों को भी अलग अनुभव देगी।
टॉय ट्रेन के संचालन की योजना
इस योजना के लिए बिहार सरकार के वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और दानापुर रेल मंडल के बीच शनिवार, 21 दिसंबर को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। विभाग और रेल मंडल की ओर से तैयार की गई इस टॉय ट्रेन यात्रा की शुरुआत नए साल के समय से होने की उम्मीद है।
टॉय ट्रेन का इतिहास
टॉय ट्रेन का इतिहास भारत में बहुत पुराना है। इसकी शुरुआत 4 जुलाई 1981 को दार्जिलिंग में हुई थी। इसके बाद कई अन्य पर्यटक स्थलों पर भी टॉय ट्रेन सेवा शुरू की गई। पटना जू में पहले 1977 में टॉय ट्रेन की शुरुआत की गई थी, जिसकी ट्रैक लंबाई 1.59 किलोमीटर थी और इसमें दो कोच थे। 2004 में इसे विस्तार देते हुए 4 कोच के साथ पुनः शुरू किया गया और ट्रैक की लंबाई बढ़ाकर 4.26 किलोमीटर कर दी गई।
2015 में बंद हुआ था टॉय ट्रेन का संचालन
वर्ष 2015 में पटना जू में टॉय ट्रेन का संचालन बंद कर दिया गया था, क्योंकि रेलवे ट्रैक में तकनीकी खराबी आ गई थी। इसके बाद पर्यटक और स्थानीय लोग लगातार इस ट्रेन के फिर से शुरू होने की उम्मीद कर रहे थे। अब, सरकार ने 9.88 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर इस ट्रेन को फिर से शुरू करने का फैसला लिया है। टॉय ट्रेन का यह नया सफर पटना जू में पर्यटन और परिवारों के लिए एक नया आकर्षण बनेगा। यह पटना वासियों और पर्यटकों को एक नया अनुभव देगा।
नई टॉय ट्रेन की विशेषताएं
नई टॉय ट्रेन में बैट्री ऑपरेटेड ईको-फ्रेंडली इंजन होगा, जिससे यह पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित रहेगा। इसमें 4 कोच होंगे, जिनमें 120 लोग बैठ सकते हैं। ट्रेन की छत पारदर्शी (ट्रांसपेरेंट) होगी, जिससे सैलानियों को प्राकृतिक दृश्य का भरपूर आनंद मिलेगा। ट्रेन के रूट पर कृत्रिम गुफाएं और झीलें तैयार की जाएंगी, जिससे यह यात्रा और भी रोमांचक हो जाएगी।
वंदना प्रेयसी, सचिव, वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने कहा कि टॉय ट्रेन के रूट की डिजाइनिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि पर्यटकों को प्राकृतिक अनुभव के साथ-साथ वन्यजीवों के संरक्षण का संदेश भी मिले।”
संचालन की तारीख और किराया
फरवरी तक निविदा प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है, और अक्टूबर से नवंबर तक इस ट्रेन के संचालन की योजना है। यह ट्रेन पटना जू के विभिन्न वन्यजीव इंक्लोजर से होकर गुजरेगी, जैसे कि गैंडा हॉल्ट, जंगल ट्रेल और मछलीघर हॉल्ट। इस यात्रा का किराया जल्द ही घोषित किया जाएगा।
पटना जू को मिलेगा नया रूप
इस टॉय ट्रेन की शुरुआत से पटना जू में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। वर्तमान में यह जू देश के चौथे सबसे बड़े चिड़ियाघर के रूप में जाना जाता है, लेकिन विभाग का उद्देश्य इसे भारत का नंबर एक जू बनाना है। इसके लिए कई योजनाएं बनाई जा रही हैं और आने वाले सालों में इसमें कई नए बदलाव देखने को मिलेंगे।

