चाईबासा : झारखंड सरकार की कैबिनेट ने हाल ही में पेसा कानून (PESA Act – (Panchayats Extension to Scheduled Areas) Act, 1996) को लागू किया है। अब इसकी जानकारी पंचायत प्रतिनिधियों को दी जा रही है। 24 दिसंबर 1996 को लागू यह केंद्रीय कानून है, जो पांचवीं अनुसूची के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में ग्राम सभा को विशेष शक्तियां प्रदान करता है। यह कानून आदिवासियों को जल, जंगल, जमीन, स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की रक्षा करने के लिए कानूनी रूप से सशक्त बनाता है।
पश्चिमी सिंहभूम जिले में पुनर्निर्मित आरजीएसए (Revamped RGSA) योजना के अंतर्गत विभिन्न जिले के विभिन्न प्रखंडों में पंचायत प्रतिनिधियों एवं कर्मियों के लिए अलग-अलग चरणों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन प्रशिक्षणों का उद्देश्य पंचायत स्तर पर नेतृत्व क्षमता, प्रशासनिक दक्षता और पेसा कानून की समझ को मजबूत करना है। जानकारी के अनुसार सशक्त पंचायत नेत्री अभियान का प्रशिक्षण 5 फरवरी से 21 फरवरी तक आयोजित किया गया।
वहीं PESA सोशल मोबिलाइजर का प्रशिक्षण 12 से 14 फरवरी तक संपन्न हुआ। इसके अतिरिक्त पंचायत सहायक का प्रशिक्षण 9 फरवरी से 27 फरवरी तक संचालित किया जा रहा है। जिले के सभी प्रखंडों में एक दिवसीय PESA (पेसा) उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन तीन चरणों में 21, 24 एवं 25 फरवरी को किया गया।
कार्यशाला में विभिन्न ग्राम पंचायतों के ग्राम सभा सदस्य, जनप्रतिनिधि तथा संबंधित पदाधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पेसा अधिनियम के प्रावधानों, ग्राम सभा की शक्तियों एवं अधिकारों की विस्तृत जानकारी देना है, ताकि पंचायत स्तर पर जनभागीदारी को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। प्रशिक्षण सत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, भूमि अधिकार, लघु वन उपज से संबंधित प्रावधानों तथा स्थानीय योजनाओं के क्रियान्वयन में ग्राम सभा की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने ग्राम सभा सदस्यों से अपील की कि वे अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों में पेसा कानून के प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करें।

