अपनी लौहनगरी एक बार फिर वर्दीवालों के आतंक की गवाह बनी है। इस बार भी वर्दीवालों ने निहत्थों पर वीरता दिखाई है। सरेबाजार नियान्बे की गिनती करने वालों पर वर्दी इस कदर कहर बन कर टूटी कि हर कोई सहम गया है। ये नियान्बे वाले भी स्वयं को फूल समझकर भौरों को रस चूसने का आमंत्रण देते रहते हैं। जैसे ही बगिया में कोई नया माली आया कि नहीं, गुलदस्ता लेकर आवभगत में टूट पड़ते हैं। कभी उनके, तो कभी अपने घर बुलाकर इत्र की बौछार कर देते हैं। इस बार जब माली की पीठ पर लाठी पड़ी, तो माली इन पर टूट पड़ा।

Politics Sahitya: बिजली का करंट कौन झेलेगा
चुनावी महापर्व की दुंदुभी पूरे देश में गूंज रही है, लेकिन अपनी लौहनगरी में सन्नाटा पसरा है। हालांकि, अब भी तीर-कमान और हाथ में फैसला नहीं हुआ है कि यहां खूंटा कौन ठोकेगा, इससे यहां असमंजस बना हुआ है। कोल्हान की परंपरागत सीट पंजे से छीनकर तीर-धनुष ने अपना दम दिखा दिया है। इससे यह माना जा रहा है कि वह अब अपनी पुश्तैनी सीट भी ले ही लेगा। वैसे भी पंजे का पैसा बैंक में ही पड़ा रह गया, इसलिए उसने मन ही मन वॉकओवर दे दिया है। अब तय करना है कि बिजली का करंट कौन झेलेगा।
भतीजे की नाक में दम
अपने चाचा का पुराना भतीजा शांत पड़ा था, तो उन्हें प्रकृति ने एक नया भतीजा दे दिया है। इस बार उन्होंने इसी भतीजे की नाक में दम कर रखा है। पहले कंपनी और मनी लाउंड्रिंग, फिर कालिखभरी जमींदारी की बखिया उधेड़ दी है। पता नहीं, चाचा की सीडी में अगली फिल्म कौन सी लोड हो रही है। अभी कुछ न कुछ बम फोड़ते रहेंगे, इसमें किसी को शक नहीं होना चाहिए। भतीजा भी सोच रहा होगा कि बेकार में उसे बड़का चुनाव में किसने फंसा दिया। अब तक तीन बार छोटे चुनाव में बाजी मार ली, लेकिन किसी ने टोका तक नहीं था।
रत्न, फिर महारत्न
जमशेदपुर की धरती पर इस बार किसका झंडा बुलंद होगा, ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। अपने दादा लगभग दो सप्ताह से टिकट लेकर घूम रहे हैं, लेकिन किसे दिखाएं। कोई सामने आ ही नहीं रहा है। एक युवा तुर्क विदेश से सम्मान लेकर इसी आस में लौटे थे कि इस बार उन्हें ओपनिंग करने से कोई नहीं रोक सकता, लेकिन दादा का सितारा इतना बुलंद था कि कोई टिक नहीं सका। इन्हें तो वहीं से रत्न, फिर महारत्न मिल चुका है, जहां दोबारा जाने का टिकट मिला है।
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