Jamshedpur (Jharkhand) : मैथिली और हिंदी के प्रतिष्ठित साहित्यकार जमशेदपुर निवासी डॉ. अशोक अविचल को ‘त्रिवेणी कांत ठाकुर पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार साहित्य रंगमंच कला आदि के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिवर्ष दिया प्रदान किया जाता है। डॉ. अशोक कुमार झा ‘अविचल’ जमशेदपुर के करनडीह स्थित एलबीएसएम कॉलेज के प्राचार्य एवं कोल्हन विश्वविद्यालय चाईबासा के प्रवक्ता हैं।
हजारीबाग में त्रिवेणीगंज न्यास ने किया सम्मानित
हजारीबाग में वहां की संस्था त्रिवेणीगंज न्यास की ओर से गुरुवार को समारोहपूर्वक डॉ. अशोक अविचल को यह पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके तहत डॉ. अविचल को 11 हजार रुपए, ताम्बे का प्रशस्ति पत्र एवं अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
डॉ. अशोक अविचल का संक्षिप्त परिचय, कृति एवं उपलब्धियां
डॉ. अशोक अविचल की मैथिली, हिंदी एवं संथाली में 28 पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है। देश के जाने-माने शिक्षाविदों में डॉ. अविचल का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। कचोट, झारखंडक डाक सनेस, संस्कृति एवं ललित संदेश जैसी मैथिली साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादन के साथ ही झारखंड वाणी हिंदी साप्ताहिक का भी 10 वर्षों तक इन्होंने संपादन किया है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और दैनिक अखबारों में उनके आलेख प्रकाशित होते रहते हैं। मैथिली के अलावा हिंदी, अंग्रेजी एवं शिक्षा इन चारों विषयों में इन्होंने स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की है।
डॉ. अशोक अविचल भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की साहित्य अकादमी के उत्तर पूर्वी क्षेत्र के संयोजक का दायित्व के अलावा अकादमी में मैथिली सलाहकार समिति के संयोजक, कार्यकारी एवं सामान्य परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं। डॉ. अविचल के कार्यकाल में लगातार दो वर्षों तक साहित्य अकादमी ने 22 भाषाओं में सर्वाधिक मैथिली की पुस्तक प्रकाशित होने का कृतिमान भी स्थापित किया है।

