नई दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपना संबोधन दिया। इसमें उन्होंने देश की समृद्ध विरासत, भविष्य की दिशा और सरकार की विभिन्न पहल पर प्रकाश डाला। राष्ट्रपति ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ जैसे महत्वपूर्ण सुधारों पर सरकार के प्रयासों की सराहना की और इसे देश के सुशासन को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। इसके साथ ही, उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर भी जोर दिया।
‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ से सुशासन में सुधार
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ की योजना का समर्थन किया। उनका मानना है कि इस प्रस्ताव से भारत में चुनावी प्रक्रिया में सुधार होगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और वित्तीय बोझ में कमी आएगी। यह कदम न केवल शासन में स्थिरता लाएगा, बल्कि नीतिगत पक्षाघात को भी समाप्त करेगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए संसद में विधेयक पेश किया जा चुका है, जो आने वाले समय में सरकार की कार्यशैली को और अधिक प्रभावी बनाएगा।
संविधान और चुनाव प्रक्रिया का महत्व
राष्ट्रपति ने संविधान की 75 साल की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के संविधान ने हमें एक परिवार की तरह जोड़ कर रखा है जो विविधता में एकता का प्रतीक है। उन्होंने संविधान सभा में विभिन्न समुदायों और वर्गों के प्रतिनिधित्व का भी उल्लेख किया। विशेष रूप से महिलाओं की भूमिका को रेखांकित किया। राष्ट्रपति ने बताया कि जब महिला सशक्तिकरण एक दूर का विचार था, तब भारतीय महिलाओं ने स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
समावेशी विकास और बुनियादी अधिकारों को प्राथमिकता पर जोर
राष्ट्रपति मुर्मू ने सरकार के समावेशी विकास पर जोर दिया और कहा कि वर्तमान सरकार ने लोक कल्याण को नई परिभाषा दी है। आवास और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों को अधिकार के रूप में स्वीकार किया गया है। इसके अलावा, पिछड़े वर्गों का डिजिटल समावेशन भी एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी बताया कि 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत अब औपनिवेशिक मानसिकता को बदलने के लिए काम कर रहा है और इसके लिए तीन नए आपराधिक कानूनों की पहल की गई है।
पर्यावरण संरक्षण में भारत की अग्रणी भूमिका
राष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भारत द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। विशेष रूप से ‘मिशन लाइफ’ (Lifestyle for Environment) के माध्यम से भारत ने वैश्विक समुदाय को पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का भी उल्लेख किया, जिसके तहत देश में 80 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य समय से पहले हासिल किया गया। यह कदम न केवल भारत की पर्यावरण सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत को एक आदर्श राष्ट्र बना रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत के इन प्रयासों से दुनिया को सीखने की आवश्यकता है।
भारत के बढ़ते कदम: अंतरिक्ष, खेल और साइबर भौतिक प्रणालियां
राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत के अंतरिक्ष, खेल और साइबर भौतिक प्रणालियों में हो रहे निरंतर विकास की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत इन क्षेत्रों में तेजी से प्रगति कर रहा है और यह देश की तकनीकी क्षमता को दर्शाता है। भारत ने अंतरिक्ष की दुनिया में अपनी पहचान बनाई है, और इसके साथ ही खेलों के क्षेत्र में भी देश की उपलब्धियां लगातार बढ़ रही हैं।
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