जमशेदपुर : आखिरी जुमे की नमाज अदा करने के लिए शुक्रवार को मस्जिदों में भीषण गर्मी के बाद भी रोजेदारों की भीड़ रही। शहर में 39 डिग्री पर पारा रहा मगर, नमाजी टस से मस नहीं हुए। मानगो की बारी मस्जिद समेत शहर की कई मस्जिदों में नमाजी धूप में सड़क पर खड़े होकर नमाज पढ़ रहे थे। साकची जामा मस्जिद में 10 हजार के आसपास नमाजियों ने जुमा की नमाज अदा की। रोजेदारों ने नम आखों से रमजान को अलविदा कहा। सब को रमजान के विदा होने का अफसोस था। दुआ हुई कि परवरदिगार आलम अगले साल ये पाक महीना फिर सबको अता फरमाए। शेर पढ़ा गया अलविदा माहे रमजान अलविदा। खुतबे में उलेमा ने बताया कि ईद एकता का त्योहार है। इसलिए कोई ऐसा कदम मत उठाएं जिससे अमन में खलल पड़े।
वक्फ बिल का हुआ विरोध
नमाज पढ़ने के लिए मस्जिदों में पहुंचे लोगों ने बांहों पर काली पट्टी बांध रखी थी। नमाजियों ने बताया कि वह वक्फ बिल का विरोध कर रहे हैं। वक्फ के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वक्फ को लेकर सरकार की नीयत ठीक नहीं है।
यहां पढ़ी गई अलविदा जुमा की नमाज
अलविदा जुमा की नमाज साकची जामा मस्जिद, मस्जिद-ए-रहमान साकची, आमबगान मस्जिद, धतकीडीह मस्जिद, मक्का मस्जिद, शास्त्रीनगर की फारुखी मस्जिद, शास्त्रीनगर की अहले हदीस मस्जिद, मानगो में बारी मस्जिद, मदीना मस्जिद, जाकिर नगर की शिया उम्मे खलील जामा मस्जिद, इमाम हुसैनी मस्जिद, ओल्ड पुरुलिया रोड की अहले हदीस मस्जिद, एकरा कॉलोनी मस्जिद, कपाली की मस्जिद-ए-हाजरा, बागानशाही मस्जिद, शबीना मस्जिद, मस्जिद-ए-उम्मे जमील कपाली आदि में पढ़ी गई। जुमा के खुतबे में उलेमा ने ईद का त्योहार अमन और खुशी के साथ मनाने की अपील रोजेदारों से की।
ईद पर जरूर निकालें फितरे की रकम
धतकीडीह की मक्का मस्जिद में पेश इमाम ने अलविदा जुमा की नमाज अदा कराई। उन्होंने रोजेदारों को बताया कि ईद के दिन फितरे की रकम नमाज से पहले निकालें। इस रकम को जितनी जल्दी हो सके गरीब तक पहुंचा दें ताकि वो परिवार भी ईद का इंतजाम कर सके। फितरे की रकम निकालना बेहद जरूरी है। मानगो की बारी मस्जिद में मौलाना ने नमाजियों को समझाया कि वो आपस में हुस्न-ए-सुलूक से रहा करें। किसी पर जुल्मों सितम ना करें। इस्लाम इंसानियत सिखाता है। मुसलमान वही है, जो दूसरे इंसानों के साथ नरमी से बर्ताव करे। उन्होंने मुल्क और काम की सलामती के लिए दुआ कराई।
इस महीने हम निजात हासिल कर पाए या नहीं
शिया जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना जकी हैदर ने खुतबे में लोगों से कहा कि हम यह देखें कि इस पाक महीने में हम अपनी निजात और मगफिरत करा पाए या नहीं। हमने कितने रोजे रखे। कितनी नमाजें पढ़ीं। हमने यह काम अल्लाह के लिए किया या फिर दुनिया को दिखाने के लिए। अल्लाह के लिए इबादत की है तो इसका सवाब मिलेगा। दुनिया को दिखाने के लिए किया है तो फिर यह समझ लीजिए कि आमाल का सवाब आपकी नीयत के हिसाब से होता है।
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