RANCHI: वैसे तो झारखंड में छोटे बच्चे कई तरह की बीमारियों की चपेट में है। लेकिन यहां के बच्चों में हार्ट की समस्या भी बढ़ती जा रही है। ये हम नहीं बल्कि एक्सपर्ट्स बता रहे है। अमृता हॉस्पिटल कोच्चि से आए कार्डियोलॉजिस्ट डॉ आर कृष्ण कुमार ने बताया कि जन्म के बाद बच्चों में हार्ट डिजीज का एक स्टैंडर्ड आंकड़ा है। ये पूरे देश में लगभग एक समान है। झारखंड में स्थिति कुछ ऐसी ही है। 1000 में से 8 बच्चों को हार्ट से जुड़ी समस्या है। इतना ही नहीं 3-4 बच्चों को सर्जरी की जरूरत भी पड़ती है। उन्होंने बताया कि अबतक झारखंड के लगभग 250 छोटे बच्चों की हार्ट सर्जरी उन्होंने की है। वहीं बच्चों का फॉलोअप भी किया जा रहा है।
59 बच्चों की होगी सर्जरी
नेशनल हेल्थ मिशन के एमडी शशि प्रकाश झा ने बताया कि जन्मजात हृदय रोग को देखते हुए सदर अस्पताल रांची में 10 और 11 अप्रैल को एक विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया है। जिसमें राज्य के अलग-अलग जिलों से लोग बच्चों को लेकर पहुंचे। पहले दिन 170 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया। उसमें 59 बच्चों की सर्जरी की जाएगी। स्क्रीनिंग के बाद डॉक्टरों ने सर्जरी के लिए उन्हें सलाह दी है। एमडी ने बताया कि अब बच्चों को उनके माता-पिता के साथ कोच्चि सर्जरी के लिए भेजा जाएगा। इस पहल में रोटरी क्लब भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संस्था द्वारा बच्चों और उनके परिजनों के आने-जाने का खर्च वहन किया जाएगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत मिलेगी।
समय पर इलाज कराना उद्देश्य
एमडी ने कहा कि यह शिविर नेशनल हेल्थ मिशन झारखंड और अमृता हॉस्पिटल कोच्चि के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की पहचान कर उन्हें समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है। शिविर में अमृता हॉस्पिटल के अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट और सर्जन बच्चों की विस्तृत जांच कर रहे हैं। उन्होंने ये भी बताया कि आगे भी इस तरह के कैंप लगाकर बच्चों की सर्जरी की जाएगी। इसमें स्वास्थ्य विभाग भी सहयोग करेगा।
ये है डॉक्टरों की टीम
शिविर में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम शामिल है, जिसमें पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. आर कृष्ण कुमार, हार्ट सर्जन डॉ. ब्रजेश पीके, डॉ. निशांत और डॉ. अमित कुमार पांडेय शामिल हैं।
इन लक्षणों पर दें ध्यान
डॉ आर कृष्ण कुमार ने बताया बच्चों में जल्दी थकान, सांस लेने में दिक्कत, नीला पड़ना या वजन न बढ़ना जैसे लक्षण हृदय रोग के संकेत हो सकते हैं। समय पर जांच और इलाज से इन बच्चों को सामान्य और स्वस्थ जीवन दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि हार्ट की सर्जरी से बच्चा पूरी तरह से ठीक हो जाता है। उसे रेगुलर फॉलोअप की जरूरत है।

