RANCHI: हाई कोर्ट में शुक्रवार को सुखदेव नगर में अतिक्रमण हटाने के मामले में महादेव उरांव की अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने संबंधित सीओ से पूछा कि भूमि से कब्जा हटाने के बजाय सीधे निर्माण को क्यों तोड़ा गया। मामले में कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम राहत को अगले आदेश तक जारी रखने का निर्देश दिया है। वहीं, कोर्ट के आदेश के आलोक में हेहल सर्किल ऑफिसर की ओर से एक शोकॉज दाखिल किया गया, जिसमें बताया गया कि हस्तक्षेपकर्ताओं को तीन बार नोटिस जारी किया गया था। इसके बावजूद उन्होंने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए, जिसके बाद निर्माण हटाने की कार्रवाई की गई।
इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। साथ ही कोर्ट ने प्रार्थी महादेव उरांव से भी पूछा कि रिट याचिका दाखिल करते समय हस्तक्षेपकर्ताओं के साथ एग्रीमेंट करने और उनसे पैसे लेने के तथ्य को क्यों छिपाया गया। कोर्ट ने इस मामले में प्रार्थी से जवाब मांगा है। साथ ही हस्तक्षेपकर्ताओं की याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें प्रतिवादी के रूप में शामिल कर लिया गया है। कोर्ट ने उन्हें सीओ द्वारा दाखिल शोकॉज पर अपना जवाब देने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 8 मई को निर्धारित की गई है।

