
रांची: कांग्रेस के गोवा, दमन एवं दादरा एवं नगर हवेली के प्रभारी तथा पूर्व मंत्री मानिक राव ठाकरे ने राम मंदिर दान मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे ट्रस्ट पर सवाल उठने के बाद भी कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर हुई है। इससे यह आशंका पैदा होती है कि प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
वे यहां शनिवार को कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दान मामले को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। पूरे मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष न्यायिक जांच कराने की मांग की। कहा कि एसआईटी रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख होने के बावजूद अब तक जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं की गई है।
नया पारदर्शी ट्रस्ट गठित करने की मांग
ठाकरे ने मांग की कि पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा तथा कथित अनियमितताओं में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने वर्तमान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर धर्माचार्यों, प्रतिष्ठित नागरिकों और विशेषज्ञों को शामिल करते हुए नया पारदर्शी ट्रस्ट गठित करने की भी मांग की।
अनियमितता नहीं हुई तो चंपत राय का इस्तीफा क्यों
ठाकरे ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे के बाद भी सरकार की ओर से इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई या आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। यदि किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई, तो श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को इस्तीफा क्यों देना पड़ा।
कांग्रेस नेता ने मंदिर को प्राप्त दान, चढ़ावे, भूमि खरीद-बिक्री तथा विभिन्न आयोजनों पर हुए खर्च का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं, इसलिए उनसे जुड़े प्रत्येक आर्थिक लेन-देन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
नकद चढ़ावे में हेराफेरी की भी हो रही जांच
ठाकरे ने दावा किया कि एसआईटी अब मंदिर में आयोजित बड़े आयोजनों के खर्चों की भी जांच कर रही है। उनके अनुसार 22 जनवरी 2024 को आयोजित प्राण-प्रतिष्ठा समारोह तथा 25 नवंबर 2025 के ध्वजारोहण कार्यक्रम के खर्चों को लेकर भी सवाल उठे हैं। इसके अलावा फर्जी रसीदों और नकद चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोपों की भी जांच की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईटी रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और उसके बैंकिंग साझेदार भारतीय स्टेट बैंक की कार्यप्रणाली में कई गंभीर लापरवाहियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार नकदी प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों द्वारा कथित अनियमितताएं सामने आने के बावजूद केवल आठ कर्मचारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की गई है, जबकि बड़े स्तर पर जवाबदेही तय नहीं की गई। संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस के महासचिव एवं मीडिया विभाग के संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव, महासचिव राजीव रंजन, प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, वरिष्ठ नेता शाहजादा अनवर, सोनल शांति तथा राजन वर्मा भी थे।

