RANCHI: शहर के धुर्वा थाना क्षेत्र से लापता मासूम अंश और अंशिका को बेचने की डील गुलगुलिया गैंग ने कर ली थी। वहीं बच्चों को पॉकेटमारी और भीख के दलदल में ढकेलने की तैयारी में थे। लेकिन, इससे पहले रामगढ़ के चितरपुर से बच्चे बरामद कर लिए गए। वहीं गिरफ्तार किए दोनों पति-पत्नी गुगुलिया गैंग से जुड़े थे। इस गैंग के तार बिहार, ओडिशा, बंगाल और यूपी तक जुड़े है। ये गैंग पिछले 10 सालों से बच्चा चोरी करने में लगा हुआ है। इस गैंग ने अबतक कई बच्चों को बेच दिया है। इस बात का खुलासा रांची एसएसपी राकेश रंजन ने रविवार को धुर्वा थाना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर की।
12 बच्चों को किया गया बरामद
एसएसपी ने बताया कि पुलिस ने बच्चा चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरोह के कब्जे से गायब 12 बच्चों को सुरक्षित बरामद किया है। साथ ही गिरोह के 13 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। जबकि दो दर्जन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस के अनुसार गुलगुलिया गैंग चोरी किए गए बच्चों से भीख मंगवाने और पॉकेटमारी का काम करवाता है। इसके अलावा चोरी किए गए बच्चियों से देह व्यापार कराए जाने की भी जानकारी मिली है। एसएसपी ने बताया कि अंश और अंशिका की डील भी इस गिरोह द्वारा कर ली गई थी।
बोकारो,धनबाद और चाईबासा के बच्चे
पुलिस के अनुसार, बरामद किए गए बच्चे बोकारो, धनबाद, चाईबासा और रांची के अलग अलग इलाकों से चोरी किए गए थे। सभी बच्चों को फिलहाल धुर्वा थाना लाया गया है, जहां उनकी देखभाल की जा रही है। रांची पुलिस अब इन बच्चों के परिजनों की पहचान और तलाश में जुट गई है। एसएसपी ने बताया कि बच्चों के परिजनों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए डीएनए जांच भी कराई जाएगी।
एसएसपी ने बताया कि अंश और अंशिका के लापता होने के बाद पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया। रांची समेत अन्य जिलों और राज्यों में बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाया। इसी अभियान के दौरान बच्चा चोर गिरोह का खुलासा हुआ। साथ ही पुलिस को इसके संगठित नेटवर्क की जानकारी मिली।
मानव अंग तस्करी की आशंका
रांची पुलिस का मानना है कि इस बच्चा चोर गिरोह का संबंध मानव अंगों के तस्करी से भी हो सकता है। इस पहलू को ध्यान में रखते हुए पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार पूछताछ और तफ्तीश के दौरान इस गिरोह से जुड़े और भी गंभीर खुलासे होने की संभावना है। बता गें कि इस पूरे मामले की शुरुआत धुर्वा थाना में दर्ज प्राथमिकी से हुई थी। बच्चों के लापता होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
प्रारंभिक स्तर पर पुलिस ने कई संभावित ठिकानों पर खोजबीन की, लेकिन काफी प्रयासों के बावजूद कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा। इसी बीच बीते 14 जनवरी को रामगढ़ जिले के चितरपुर इलाके से अहम सूचना पुलिस को मिली। चितरपुर के एक युवक ने संदिग्ध स्थिति में बच्चों को देखा और तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई और कार्रवाई करते हुए दोनों बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया।
पांच महीने से रांची में जमाए थे डेरा
जांच में सामने आया कि आरोपी सोनी कुमारी और उसका पति नव खेरवार उर्फ सूर्या पिछले पांच महीनों से रांची में रह रहे थे। दोनों धुर्वा स्मार्ट सिटी जाने वाले मार्ग के पास उस स्थान पर डेरा जमाए हुए थे, जहां गुलगुलिया समुदाय के लोग रहते थे। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी लंबे समय से बच्चों की तलाश में थे और इलाके में लगातार घूमते रहते थे। पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि आरोपी दंपति गुब्बारा बेचने का काम करते थे। अलग अलग इलाकों में घूमते रहते थे और मौका पाकर बच्चों को निशाना बनाने की फिराक में रहते थे। पुलिस के सामने उन्होंने स्वीकार किया कि बच्चों को अगवा करने के बाद वे काफी समय तक हटिया इलाके में ही रुके थे।
पुलिस दबिश के बाद भागने की कोशिश
आरोपियों ने बताया कि पुलिस की गतिविधियां तेज होने के बाद उन्हें पकड़े जाने का डर सताने लगा। इसके बाद वे दोनों बच्चों को लेकर रामगढ़ फरार हो गए। इस दौरान वे बच्चों का भरोसा जीतने के लिए उनकी हर इच्छा पूरी कर रहे थे, ताकि बच्चे किसी को कुछ न बता सकें। पुलिस पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी दंपति बच्चों को लेकर बिहार भागने की तैयारी में थे।
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