नई दिल्ली: रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) की डिजिटल शाखा, जियो प्लेटफॉर्म्स ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने डिजिटल एप्लिकेशनों और सेवाओं को ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी से सशक्त बनाने के लिए ब्लॉकचेन कंपनी पॉलीगॉन लैब्स के साथ साझेदारी की है। इस साझेदारी के माध्यम से जियो के 450 मिलियन से ज्यादा ग्राहकों को पॉलीगॉन के ब्लॉकचेन समाधान का लाभ मिलने की उम्मीद है।
जियो और पॉलीगॉन की साझेदारी का महत्व
पॉलीगॉन लैब्स के भुगतान के वैश्विक प्रमुख, ऐश्वर्या गुप्ता के अनुसार, यह साझेदारी रिलायंस को पॉलीगॉन के मजबूत और प्रभावी बुनियादी ढांचे का उपयोग करने का अवसर देती है, जिससे वे अपने उपयोगकर्ताओं को वेब3 तकनीक के उपयोग में सक्षम बना सकते हैं। पॉलीगॉन के बैकएंड पर चलने वाले एप्लिकेशनों का निर्माण करना इस साझेदारी का एक प्रमुख उद्देश्य है। इसका उद्देश्य नई और उन्नत तकनीकों का लाभ उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाना है।
गुप्ता ने यह भी कहा कि इस साझेदारी के तहत रिलायंस को न केवल क्रिप्टोकरेंसी और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) से संबंधित समाधान मिलेंगे, बल्कि ब्लॉकचेन तकनीक के अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे समुदाय आधारित सेवाएं और भुगतान सेवाएं भी विकसित की जा सकेंगी।
ब्लॉकचेन और वेब3 का भविष्य
पॉलीगॉन और रिलायंस की साझेदारी का उद्देश्य केवल क्रिप्टोकरेंसी तक सीमित नहीं है। यह साझेदारी एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और ब्लॉकचेन का संयोजन करके नए एजेंटिक फ्रेमवर्क बनाने की दिशा में काम कर सकती है। गुप्ता के अनुसार, इससे ब्लॉकचेन पर आधारित नए प्रकार की सेवाओं का निर्माण किया जा सकेगा, जिनमें भुगतान और विकेंद्रीकरण जैसी सेवाएं शामिल हैं।
गुप्ता ने यह भी बताया कि वेब3 टेक्नोलॉजी की मदद से उपयोगकर्ताओं को ज्यादा नियंत्रण और स्वतंत्रता प्राप्त होगी। इसे इंटरनेट की अगली पीढ़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी, NFT (नॉन-फंजीबल टोकन) और विकेंद्रीकृत वित्त जैसे उपयोग के मामलों को बढ़ावा मिलेगा। यह उपयोगकर्ताओं को अधिक सुरक्षा और नियंत्रण प्रदान करता है।
विकेंद्रीकरण और ब्लॉकचेन का विकास
पॉलीगॉन ने अब तक फ्लिपकार्ट जैसी बड़ी कंपनियों के साथ साझेदारी कर के वेब3 टेक्नोलॉजी का उपयोग किया है। यह साझेदारियां सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए अदृश्य रहती हैं क्योंकि उनका काम बैकएंड में होता है। इसके बावजूद, यह ब्लॉकचेन आधारित समाधानों की शक्ति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
पॉलीगॉन ने अपनी शुरुआत 2017 में Matic Network के रूप में की थी, लेकिन 2021 में इसे पॉलीगॉन के नाम से रीब्रांड किया गया। 2022 में इसने अपने मूल MATIC टोकन की निजी बिक्री से लगभग 450 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई, जो इसके विकास को गति देने में मददगार साबित हुई।
जियो क्रिप्टो: क्या है Jio Coin?
रिलायंस के इस कदम को ध्यान में रखते हुए, यह साफ हो जाता है कि कंपनी भविष्य में क्रिप्टोकरेंसी के क्षेत्र में एक बड़ी भूमिका निभाने की योजना बना रही है। “Jio Coin” के नाम से एक नई क्रिप्टोकरेंसी लॉन्च किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। यह पूरी तरह से रिलायंस के डिजिटल इकोसिस्टम से जुड़ा होगा और इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को एक सुरक्षित और तेज़ डिजिटल वित्तीय अनुभव प्रदान करना हो सकता है।
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