नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ गुजरात पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया गया है। मामला उनके द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किए गए एक वीडियो से जुड़ा था, जिसमें वे हाथ हिलाते हुए चलते नजर आ रहे थे और उन पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाई जा रही थीं। इस वीडियो के बैकग्राउंड में ऐ खून के प्यासे बात सुनो” गाना बज रहा था, जिसे लेकर गुजरात पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा
यह कोई अपराध नहीं सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अभय ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि साहित्य और कला जीवन को अधिक सार्थक बनाते हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि गरिमापूर्ण जीवन के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि इमरान प्रतापगढ़ी द्वारा पोस्ट किया गया वीडियो किसी भी तरह से अपराध की श्रेणी में नहीं आता।
क्या था पूरा मामला?
गुजरात पुलिस ने कांग्रेस सांसद के खिलाफ यह कहते हुए मामला दर्ज किया था कि इस गाने के बोल भड़काऊ हैं और राष्ट्रीय एकता के लिए हानिकारक हो सकते हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि वीडियो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात पुलिस के इस दावे को खारिज कर दिया और एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट का अहम संदेश
इस फैसले के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा को लेकर एक बार फिर महत्वपूर्ण संदेश दिया है। अदालत का कहना है कि व्यंग्य और कला हमारे जीवन को अधिक सार्थक बनाते हैं और यह किसी भी तरह का अपराध नहीं हो सकता।
Read also – Jamshedpur Private School News : निजी स्कूलों से तीन साल की फीस और ऑडिट रिपोर्ट मांगी

