RANCHI: राज्य के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल रिम्स में मरीजों का इलाज उनकी जान जोखिम में डालकर किया जा रहा है। रिम्स के पुराने भवन की स्थिति दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। दीवारों में दरारें, छतों से गिरता प्लास्टर, टूटी टाइल्स और जर्जर दीवारें अब किसी बड़े हादसे की ओर इशारा कर रही हैं। इसके बावजूद रिम्स प्रबंधन की नींद अब तक नहीं खुली है। ऐसे में सवाल यह उठता है क्या किसी हादसे के बाद प्रबंधन की नींद खुलेगी।
1500 मरीज पुराने भवन में
जानकारी के अनुसार, पुराने भवन में करीब 1500 मरीज इन दिनों भर्ती हैं। कई वार्डों में छत टपक रही है, दीवारें झड़ रही हैं। फर्श के टाइल्स टूट जाने के कारण ट्रॉली डगमगा रही है न जिससे कि मरीज के ट्रॉली से गिरने का खतरा बढ़ गया है। कई मरीज इस वजह से चोटिल भी हो चुके हैं। परिजनों ने भी कई बार शिकायत की, लेकिन प्रबंधन ने अब तक मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यह हाल तब है जब झारखंड हाईकोर्ट ने भी पुराने भवन की मेंटेनेंस और सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश दिए थे।
डॉक्टर और स्टाफ भी परेशान
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक रिम्स प्रबंधन ने न तो मेंटेनेंस का काम शुरू किया और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की। कई डॉक्टरों और कर्मचारियों ने भी कहा कि इस भवन में काम करना जोखिम भरा है। लेकिन मजबूरी में इलाज जारी रखना पड़ रहा है। चिंताजनक बात यह है कि मेंटेनेंस के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये का खर्च दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस है।
टीम ने प्रबंधन को सौंपी थी रिपोर्ट
हॉस्पिटल का इंस्पेक्शन करने के बाद टीम ने रिम्स प्रबंधन को एक रिपोर्ट सौंपी थी। जिसमें बताया था कि भवन के कई इलाके जर्जर हालत में है। ऐसी जगह पर मरीजों का इलाज नहीं किया जा सकता। इसके बाद प्रबंधन ने एक आदेश जारी किया था। जिसमें साफ कहा गया था कि ऐसी जगह पर मरीजों को भर्ती कर इलाज नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया गया। और न ही मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट करने पर विचार किया गया।

