RANCHI: रिम्स में प्राइवेट हॉस्पिटलों और नर्सिंग होम से आने वाले मरीजों के रेफरल की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से एसओपी तैयार की जा रही है। इसे लेकर रिम्स में शहर के प्रमुख प्राइवेट हॉस्पिटलों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की गई। रिम्स जीबी के निर्देश पर आयोजित इस बैठक में प्राइवेट हॉस्पिटलों से सुझाव प्राप्त करने और रेफरल प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए समन्वय स्थापित करने पर चर्चा की गई। बैठक में मेदांता अस्पताल, सैमफोर्ड अस्पताल और मां राम प्यारी अस्पताल के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और रेफरल प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर अपने सुझाव साझा किए। हालांकि मणिपाल अस्पताल और पारस अस्पताल की ओर से कोई प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित नहीं था।
40 परसेंट रेफरल मरीज
रिम्स प्रबंधन के अनुसार उपलब्ध आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि रिम्स में आने वाले कुल मरीजों में से लगभग 40 प्रतिशत मरीज प्राइवेट से रेफर होकर आते हैं। इनमें से अधिकतर मरीज शाम 5 बजे से रात 9 बजे के बीच भेजे जाते हैं। आंकड़ों पर नजर डाले तो केवल दिसंबर माह में रिम्स के इमरजेंसी विभाग में 5,994 मरीज लाए गए, जिनमें से लगभग 1,200 मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। वहीं जनवरी में इमरजेंसी में कुल 6,038 मरीज पहुंचे, जिनमें से 1,328 मरीज वेंटिलेटर पर थे। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि रिम्स पर गंभीर मरीजों का भारी दबाव रहता है।
कई तरह की समस्याएं आई सामने
रिम्स प्रबंधन ने बताया कि हाल के वर्षों में स्वास्थ्य व्यवस्था में कई तरह की समस्याएं सामने आई हैं। इनमें चिकित्सकीय आवश्यकता के बिना मरीजों को रेफर करना, पर्याप्त आधारभूत संरचना या मानव संसाधन के अभाव वाले संस्थानों में भर्ती करना, गंभीर मरीजों को बिना उचित स्टेबलाइजेशन के स्थानांतरित करना, आर्थिक कारणों से इलाज से इंकार करना और अपंजीकृत संस्थानों द्वारा उपचार जैसे मामले शामिल हैं। ऐसी प्रथाएं मरीजों के जीवन के लिए खतरा पैदा करने के साथ-साथ नैतिक मानकों और संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन करती हैं।
स्टेबल होने पर मरीज को करेंगे रेफर
नई SOP के तहत अब किसी भी मरीज को रिम्स रेफर करने से पहले उसकी मेडिकल स्टेटस का उचित आकलन, आवश्यक प्रारंभिक उपचार और पर्याप्त स्टेबलाइजेशन सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। साथ ही रेफरल का स्पष्ट कारण दर्ज करना, उपचार की निरंतरता बनाए रखना और गंभीर मरीजों को भेजने से पहले आईसीयू बेड व वेंटिलेटर की उपलब्धता की पुष्टि करना भी जरूरी होगा। रिम्स प्रबंधन ने सभी प्राइवेट हेल्थ आर्गनाइजेशन से अपील की है कि वे मरीजों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस SOP का पालन करें और सुरक्षित व व्यवस्थित रेफरल प्रणाली सुनिश्चित करने में सहयोग करें।

