RANCHI: प्रदेश राजद प्रवक्ता कैलाश यादव ने आरोप लगाया कि देशभर में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के पीछे केंद्र सरकार का छिपा हुआ एनआरसी एजेंडा काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संस्था से अपेक्षा होती है कि वह निष्पक्ष काम करे। लेकिन वर्तमान में आयोग पर भाजपा और आरएसएस के एजेंडे को बढ़ावा देने का आरोप लग रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर के बहाने गैर-भाजपा वोटर्स विशेषकर मिशनरी, मुस्लिम, यादव, आदिवासी और प्रवासी मजदूर वर्ग को निशाना बनाकर बड़ी संख्या में मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि बिहार में हाल ही हुई एसआईआर प्रक्रिया में लाखों लोगों के नाम काटे गए, जिसका चुनाव परिणामों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

जनविरोध से ठंडे बस्ते में गया एनआरसी
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार वर्ष 2019 में भी एनआरसी लागू करने का प्रयास कर चुकी थी, लेकिन जनविरोध के कारण मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। अब कथित रूप से उसी एजेंडे को एसआईआर प्रक्रिया के माध्यम से लागू करने की कोशिश की जा रही है। राजद ने चुनाव आयोग से मांग की है कि वह बताए देश में अब तक कितने घुसपैठियों की पहचान की गई है और संबंधित सूची सार्वजनिक की जाए। यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह लगातार घुसपैठियों की बात कर रहे हैं तो 11 वर्षों के शासन के बावजूद यह समस्या क्यों बनी हुई है?
हटाए जा रहे गैर बीजेपी वोटर्स
कैलाश यादव ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर गैर-भाजपा वोटर्स को व्यवस्थित तरीके से हटाया जा रहा है। बिहार चुनाव में राजद को सर्वाधिक वोट मिलने के बावजूद विशेष मशीनरी के इस्तेमाल से परिणाम प्रभावित हुए, यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि राजद इस मुद्दे को जनता के बीच मजबूती से उठाता रहेगा।

