RANCHI: रेलवे सुरक्षा बल रांची मंडल और राष्ट्रीय महिला आयोग के सहयोग से सोमवार को आफिसर्स क्लब हटिया में मानव तस्करी पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। यह सेमिनार रेलवे बोर्ड के निर्देश पर आयोजित किया गया। जिसका उद्देश्य मानव तस्करी की रोकथाम और उससे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विभिन्न एजेंसियों की भूमिका को सुदृढ़ करना था। मंडल रेल प्रबंधक और कमांडेंट आरपीएफ रांची मंडल ने मानव तस्करी को एक गंभीर सामाजिक अपराध बताते हुए कहा कि इसके विरुद्ध लड़ाई में सभी संबंधित विभागों, सुरक्षा एजेंसियों, सामाजिक संगठनों और समुदाय के समन्वित प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने रेलवे परिसरों, ट्रेनों और प्लेटफार्मों पर सतर्कता बढ़ाने के साथ संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई पर बल दिया।
तस्करी के तरीकों पर चर्चा
सेमिनार में राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य प्रतिनिधि डी. कोलेंगा और ममता, विधि विशेषज्ञ स्वप्निल किशोर और शक्ति वाहिनी एनजीओ के संस्थापक निशिकांत ने रिसोर्स पर्सन के रूप में सहभागिता की। वक्ताओं ने मानव तस्करी की अवधारणा, उसके विभिन्न स्वरूपों और आयामों पर प्रकाश डाला। साथ ही तस्करों द्वारा अपनाए जाने वाले तरीकों, इसके सामाजिक और आर्थिक कारणों पर चर्चा की। इसके अलावा सोशल मीडिया के बढ़ते दुरुपयोग, पीड़ितों के परिवहन और स्थानांतरण की प्रक्रिया तथा रोकथाम, पहचान व हस्तक्षेप की प्रभावी रणनीतियों की विस्तृत जानकारी दी।
फ्रंटलाइन स्टाफ की भूमिका महत्वपूर्ण
उन्होंने बताया कि तस्करी की पहचान के लिए फ्रंटलाइन स्टाफ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। संदिग्ध गतिविधियों की समय पर पहचान, पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार, अंतर-एजेंसी समन्वय और कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी से इस अपराध पर नियंत्रण संभव है। साथ ही पीड़ितों के पुनर्वास और संरक्षण के पहलुओं पर भी चर्चा की गई। सेमिनार में दक्षिण पूर्व रेलवे के सभी मंडलों और मुख्यालय से आरपीएफ के अधिकारी, रांची मंडल के वाणिज्य, परिचालन विभाग के कर्मचारी, जीआरपी रांची, एएचटीयू और स्थानीय थानों के पुलिसकर्मी, चाइल्डलाइन प्रतिनिधि, बचपन बचाओ आंदोलन के सदस्य समेत कई संगठनों के प्रतिभागियों ने भाग लिया।

