जमशेदपुर : साहित्य, सिनेमा एवं कला संस्था ‘सृजन संवाद’ ने 16 दिसम्बर 2025 को शाम छह बजे तीन महादेशों के वक्ताओं ने ऋत्विक घटक, राजकपूर व गुरुदत्त की फिल्मों पर बात की। अवसर था तीन सिने-निर्देशकों के शताब्दी समारोह का। कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया से अनीता बरार, कोचीन से डाल्टन एवं लंदन से तेजेंद्र शर्मा ने गुरुदत्त, ऋत्विक घटक एवं राजकपूर पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में वक्ताओं का परिचय ऊधमपुर से शाइनी शर्मा ने दिया। कार्यक्रम करीम सिटी कॉलेज के मासकॉम विभाग तथा क्रिटिक सर्किल ऑफ़ इंडिया के सहयोग से हुआ। संचालन डॉ. विजय शर्मा का रहा। कार्यक्रम स्ट्रीमयार्ड एवं सृजन संवाद फ़ेसबुक लाइव के माध्यम से हुआ, जो यूट्यूब पर भी दिखेगा। इसे गोरखपुर से अनुराग रंजन संचालित कर रहे थे।
सृजन संवाद पहले भी इन तीन निर्देशकों पर अलग-अलग कार्यक्रम कर चुका है। डॉ. विजय शर्मा ने बताया कि आज का कार्यक्रम पिछले वालों से भिन्न है। तीन महादेशों को को-ऑर्डिनेट करने में कई मुश्किलें आईं। समय अलग-अलग होने के कारण जब भारत में शाम होती है, लंदन में कुछ और समय होता है। ऑस्ट्रेलिया में उस समय रात हो चुकी होती है। वहां काफ़ी रात होने के बावजूद अनीता बरार का सृजन संवाद में स्वागत किया गया। तेजेंद्र शर्मा सीधे अपनी ड्यूटी से आकर जुड़ गए। कोचीन के डाल्टन का भी जुड़े। इसके साथ फ़ेसबुक लाइव से जुड़े दर्शकों-श्रोताओं, मीडिया एवं अन्य लोगों का स्वागत किया गया। चित्रकार, लेखक, सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से सक्रिय, शिक्षा, विभिन्न भाषाओं में काम करने वाली शाइनी शर्मा ने वक्ताओं का परिचय दिया।
कई भाषा-साहित्य की जानकार शाइनी शर्मा ने कहा कि पुरस्कृत डॉक्यूमेंट्री बनाने वाली, लेखन को अपना जुनून मानने वाली अनीता बरार के लिखे नाटक सिडनी में मंचित हुए हैं। कम्युनिटी एम्बेसडर अनीता बरार ने गुरुदत्त पर अपनी बात रखी। अनीता बरार ने गुरुदत्त की दो फ़िल्मों ‘बाज़ी’ एवं ‘प्यासा’ के माध्यम से गुरुदत्त की निर्देशकीय सूझबूझ व कौशल को विस्तार से बताया। उनकी फ़िल्म के गाने कहानी को आगे बढ़ाते हैं। गुरुदत्त के फ़्रेम, उनकी फ़िल्मों के गीत की चर्चा करते उन्होंने बताया, गुरुदत्त अपनी फ़िल्मों में किरदारों के मनोवैज्ञानिक हालात, कैमरा, रोशनी-छाया द्वारा दर्शक को एक अलग दुनिया में ले जाते हैं। वे कविता जैसी कहानी को बिना आज की तकनीक सुविधाओं के बिना विजुअल्स को काफ़ी इनोवेटिव तरीके से दिखाते हैं।
क्रिस्टोर डाल्टन नेशनल फ़िल्म अवार्ड जूरी मेम्बर, फ़िल्म क्रिटिक तथा म्यूजिक जर्नलिस्ट जरनल ऑफ़ इंडियन फ़िल्म सिनेमा के संपादक, सिनेमा सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के संस्थापक हैं, वे कई विश्वविद्यालय में सिनेमा के लेक्चर के लिए आमंत्रित किए जाते हैं। उनकी ‘रिलेटिविटी थ्योरी ऑफ़ इंडियन सिनेमा’ की पांडुलिपि तैयार है। कई सिनेमा समारोह के मानक पदों पर रहे डाल्टन का परिचय देते हुए मिसेज शर्मा ने उन्हें ऋत्विक घटक पर बोलने के लिए बुलाया। डाल्टन ने ऋत्विक घटक की ‘स्वर्णरेखा’ को जैसा समझा उसे सबसे साझा किया। घटक विस्थापन को कभी भूल न सके। उनके मनोविज्ञान को देखते हुए उन्हें अपने आदर्श में लिपटा हुआ, अपने खोल में समाया हुआ कहा जा सकता है। वे नॉस्टाल्जिया से कभी बाहर नहीं आए। इसी कारण वे नाम और नामा से सदा दूर रहने का प्रयास करते थे। जीनियस घटक अपनी भावनाओं एवं आदर्शों के गुलाम थे। कम्युनिज्म शक्ति का खेल है जिसकी कागज समानता की बात वास्तविकता में न होगी और न ही है। अच्छा-बुरा दो अलग चीजें नहीं हैं। यह निर्देशक अपने पात्रों से अपनी बातें निकालता है। डॉल्टन ने प्रश्न किया, ‘स्वर्णरेखा’ में कौन प्रोटगनिस्ट है? यह फ़िल्म घटक को दिखाती है।
सेंसिबल व सेंसिटिव फिल्में बनाते थे राजकपूर
तीसरे वक्ता का परिचय देते हुए शाइनी शर्मा ने उन्हें राजकपूर पर बोलने के लिए आमंत्रित किया। पुरवाई के संपादक, प्रसिद्ध कहानीकार, अभिनेता, कवि, मेम्बर ऑफ़ दि ऑर्डर ऑफ़ द ब्रिटिश एम्पायर तेजेंद्र शर्मा ने राजकपूर की ‘श्री 420’ पर कहा कि दर्शक राज कपूर की फ़िल्म देखने टिकट खरीद कर जाता है। जबकि ऐसे निर्देशक भी हुए हैं, जिनकी फ़िल्में पैसे देने पर भी सामान्य दर्शक नहीं देखना चाहेगा। उनकी फ़िल्म देख कर गरीब होने की इच्छा होती है, ना कि गरीबों से घृणा। फ़िल्म के गानों, कहानी पर उन्होंने निर्देशक की विशेषताओं को रेंखांकित किया। राजकपूर सेंसिबल और सेंसिटिव फ़िल्म बनाते थे, इसीलिए दर्शक उनकी फ़िल्मों से कनेक्ट हो पाता था। तेजेंद्र शर्मा ने एक गज़ल सुना कर समारोह में समां बांध दिया।
इनकी उपस्थिति रही उल्लेखनीय
वक्ताओं ने प्रश्नों के उत्तर दिए। करीम सिटी कॉलेज के मास कॉम की विभागाध्यक्ष, और इंग्लिश-हिन्दी दोनों भाषा में लिखने वाली डॉ. नेहा तिवारी ने वक्तव्यों को समेट हुए सबका धन्यवाद किया। फ़ेसबुक लाइव के माध्यम से जमशेदपुर से साहित्य कला फ़ाउंडेशन की न्यासी डॉ. क्षमा त्रिपाठी, शिक्षिका वीणा कुमारी, यायावरी वाया भोजपुरी फ़ेम के वैभव मणि त्रिपाठी, दिल्ली से रक्षा गीता, अशीष कुमार सिंह, नीलिमा काराइया, सुषमा देवी, पुणे से सिने-इतिहासकार मनमोहन चड्ढा, बेंगलुरु से पत्रकार अनघा मारीषा आदि की सहभागिता रही। इनकी टिप्पणियों एवं प्रश्नों से कार्यक्रम और अधिक सफ़ल हुआ। नए साल की गोष्ठी मैथिली भाषा के कार्यक्रम से होगी, इस घोषणा के साथ समारोह समाप्त हुआ।
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