Home » SC ON COCONUT OIL : नारियल तेल के छोटे पैक पर ‘सुप्रीम’ फैसला…. कंपनियों को मिली राहत, जानें क्यों

SC ON COCONUT OIL : नारियल तेल के छोटे पैक पर ‘सुप्रीम’ फैसला…. कंपनियों को मिली राहत, जानें क्यों

by Rakesh Pandey
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने छोटे पैकेज में बिकने वाले नारियल तेल को खाद्य तेल के रूप में वर्गीकृत करने का अहम फैसला सुनाया है, जिससे 15 साल से चल रहा विवाद अब सुलझ गया है। इससे नारियल तेल उत्पादक कंपनियों और उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। यह निर्णय खासकर उन छोटे पैक के उत्पादकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो 200 मिली या 500 मिली से कम के पैक में नारियल तेल बेचते थे, लेकिन इसके वर्गीकरण को लेकर लंबे समय से कानूनी जटिलताएं बनी हुई थीं।

लंबे समय से चल रही अस्पष्टता का समाधान

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने उस अस्पष्टता को समाप्त कर दिया, जो छोटे पैक में बेचे जाने वाले नारियल तेल को खाद्य तेल या कॉस्मेटिक उत्पाद के रूप में वर्गीकृत करने के सवाल पर थी। इससे पहले, कई उत्पादकों को यह स्पष्ट नहीं था कि उनके उत्पादों पर किस तरह का टैक्स लगेगा और क्या उन्हें खाद्य तेल की श्रेणी में रखा जाएगा या नहीं। खाद्य तेलों पर आमतौर पर अधिकतर उत्पादों के मुकाबले कम जीएसटी और वैट दरें लगती हैं, जबकि कॉस्मेटिक और औद्योगिक उत्पादों पर ज्यादा टैक्स होता है।

टैक्स में राहत से लाभ

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब छोटे पैक नारियल तेल पर कर की दरें कम हो सकती हैं। जब कोई उत्पाद खाद्य तेल के रूप में वर्गीकृत होता है, तो उस पर कम जीएसटी और वैट लगाया जाता है। इससे उत्पादकों की लागत में कमी आएगी और उपभोक्ताओं के लिए भी सस्ती दर पर नारियल तेल उपलब्ध हो सकेगा। इसके अलावा, कंपनियों को अपने उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने का एक नया अवसर मिलेगा, क्योंकि वे अब अपने उत्पाद को खाद्य तेल के रूप में प्रमोट कर सकती हैं।

राज्य स्तर पर चुनौतियां

यह विवाद खासकर केरल और तमिलनाडु जैसे प्रमुख नारियल उत्पादक राज्यों में उत्पन्न हुआ था, जहां विभिन्न राज्य स्तर पर नारियल तेल के वर्गीकरण के बारे में अलग-अलग व्याख्याएं थीं। यह स्थिति उत्पादकों के लिए कानूनी और वित्तीय दोनों ही दृष्टिकोण से चुनौतीपूर्ण थी। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इस भ्रम की स्थिति का अंत हुआ है, और कंपनियों को स्पष्ट दिशा मिल गई है। इससे वे अब अपने उत्पादों को एक निश्चित वर्ग में रखकर सही तरीके से मार्केट कर सकेंगी।

उत्पादकों और उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से केवल निर्माता ही नहीं, बल्कि उपभोक्ता भी लाभान्वित होंगे। चूंकि छोटे पैक नारियल तेल पर टैक्स कम हो सकता है, इसलिए इसका प्रभाव सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। इसके अलावा, यह निर्णय भारतीय नारियल तेल उद्योग के लिए एक टर्निंग प्वाइंट हो सकता है, क्योंकि अब इसे एक स्पष्ट कानूनी ढांचे के तहत विपणन किया जा सकेगा।

इस फैसले से न सिर्फ नारियल तेल उत्पादक कंपनियों को राहत मिली है, बल्कि यह उपभोक्ताओं के लिए भी सस्ती कीमत पर गुणवत्तापूर्ण नारियल तेल खरीदने का अवसर प्रदान करेगा। इसके अलावा, यह उत्पादकों को उनके उत्पादों की बाजार स्थिति को सुधारने का मौका देगा, जिससे उद्योग में नए अवसर खुल सकते हैं। कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारतीय नारियल तेल उद्योग के लिए एक सकारात्मक कदम साबित हो सकता है।

Read Also- Google ने चुपके से Play Store से हटाया पॉपुलर फीचर, अब ऐप शेयरिंग हुई मुश्किल

Related Articles