चाईबासा : टाटा स्टील, नोवामुंडी ने गुरुवार को अपने खनन कार्यों के 100 साल पूरे होने का जश्न मनाया। कार्यक्रम की शुरुआत- 100 साल फिर से जीना : नोवामुंडी की गाथा- नामक ऑडियो-विजुअल फीचर की स्क्रीनिंग के साथ हुई, जिसमें नोवामुंडी के दशकों के बदलाव को दिखाया गया। टाटा स्टील के महाप्रबंधक, अयस्क खान और खदानें, अतुल भटनागर ने नोवामुंडी के एक मॉडल खनन स्थल बनने की यात्रा पर प्रकाश डाला।

अतीत के पन्ने- नामक एक भावुक खंड ने वर्तमान और पूर्व नेतृत्व की अमूल्य यादों को जीवंत कर दिया। टाटा स्टील के वीपी-कॉरपोरेट सर्विसेज डीबी सुंदर, जो पहले वीपी- रॉ मैटेरियल थे, ने नोवामुंडी में काम करने के दौरान वाले अनुभव साझा किए। इसके बाद पूर्व अधिकारियों एएम मिश्रा और एडी बैजल के किस्से सुनाए गए, जिन्होंने नोवामुंडी की खनन यात्रा के महत्वपूर्ण अध्यायों और इसे आकार देने वाले लोगों को याद किया। उत्सव का मुख्य आकर्षण टीवी नरेंद्रन, सीईओ और प्रबंध निदेशक, टाटा स्टील, संदीप कुमार, वीपी-रॉ मैटेरियल, टाटा स्टील ने स्मृति चिह्न और कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। कॉफी टेबल बुक, नोवामुंडी की 100 साल की यात्रा का एक दृश्य और कथात्मक इतिहास है।
टाटा स्टील की तरक्की में नोवामुंडी का अहम योगदान : नरेंद्रन
अपने संबोधन में, टाटा स्टील के सीईओ-सह- एमडी टीवी नरेंद्रन ने शताब्दी मील के पत्थर के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नोवामुंडी का योगदान टाटा स्टील की तरक्की में अहम रहा है। इसने लगातार ज़िम्मेदार माइनिंग, सस्टेनेबिलिटी और कम्युनिटी जुड़ाव में बेंचमार्क स्थापित किए हैं, जिससे यह कंपनी के कच्चे माल के ऑपरेशन्स का एक आधार बन गया है। शताब्दी समारोह उन पीढ़ियों के लोगों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने नोवामुंडी का निर्माण किया। 1925 में इसकी शुरुआत से लेकर आज भारत की सबसे तकनीकी रूप से उन्नत, टिकाऊ और सामाजिक रूप से ज़िम्मेदार माइनिंग यूनिट्स में से एक बनने तक।
Read Also : Chaibasa Elephant Attack : हाथी ने युवक की पटक-पटक कर ले ली जान, ग्रामीणों का वन विभाग के प्रति आक्रोश

