प्रयागराज : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेला 2025 का तीसरा अमृत स्नान बसंत पंचमी के पावन अवसर पर शुरू हो चुका है। इस दिन विशेष रूप से लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम पर एकत्रित हो रहे हैं, जहां पवित्र स्नान का महत्व अत्यधिक है। इस दिन, विभिन्न अखाड़ों के साधुओं ने त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाकर धार्मिक आस्था को मजबूत किया। विशेष रूप से, महानिर्वाणी और अटल अखाड़ों के साधुओं ने भी इस अमृत स्नान में भाग लिया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
महाकुंभ मेला एक ऐतिहासिक और धार्मिक आयोजन है, जो प्रत्येक कावंड़ियों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। तीसरे अमृत स्नान के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण को लेकर प्रशासन ने खास इंतजाम किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मेला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। प्रयागराज (पूर्व नाम इलाहाबाद) शहर और मेला क्षेत्र में 4 फरवरी तक वाहनों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था और सड़कों पर यातायात का दबाव न बढ़े।
इसके साथ ही, VVIP पास भी रद्द कर दिए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की भीड़-भाड़ और अव्यवस्था से बचा जा सके। त्रिवेणी घाटों पर अत्यधिक दबाव को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और सीनियर अफसरों की भी टीम मौजूद रहेगी। प्रशासन ने घाटों पर बैरिकेडिंग की संख्या भी बढ़ा दी है, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
आसान यातायात व्यवस्था
महाकुंभ मेला के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम पहुंचने के लिए विभिन्न मार्गों का उपयोग करते हैं। यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए पुलों की संख्या बढ़ाई गई है। अरैल से झूंसी जाने के लिए पुल नंबर 28 को खोला गया है। संगम से झूंसी जाने के लिए पुल नंबर 2, 4, 8, 11, 13, 15, 17, 20, 22, 23 और 25 का प्रयोग किया जा सकता है। वहीं, झूंसी से संगम जाने के लिए श्रद्धालु पुल नंबर 16, 18, 21 और 24 का उपयोग कर सकते हैं। झूंसी से अरैल जाने के लिए पुल नंबर 27 और 29 खुले हैं। इस प्रकार, श्रद्धालु इन विभिन्न मार्गों का उपयोग करके आसानी से आना-जाना कर सकेंगे।
महाकुंभ की आस्था और महत्व
महाकुंभ मेला भारतीय धर्म और संस्कृति का एक अद्वितीय उदाहरण है। इस अवसर पर त्रिवेणी संगम के पानी में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है, और इसे जीवन में एक बार जरूर करना चाहिए। इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दिन पवित्र स्नान करने से आत्मा को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। अमृत स्नान के दौरान साधु-संतों, अखाड़ों और लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति इस महान अवसर की गरिमा को और बढ़ाती है। इस बार बसंत पंचमी के दिन, तीसरे अमृत स्नान में विशेष श्रद्धा और उत्साह देखा जा रहा है।

