Ranchi (Jharkhand) : झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले में गिरफ्तार वरिष्ठ IAS अधिकारी विनय चौबे ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अब उनकी ओर से दायर क्रिमिनल रिट याचिका पर 13 जून 2025 को सुनवाई की जाएगी। यह मामला न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत में सूचीबद्ध है, जहां अधिवक्ता देवेश अजमानी उनकी ओर से पक्ष रखेंगे।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस की अनदेखी का आरोप
विनय चौबे ने याचिका में दावा किया है कि एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा गिरफ्तारी प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी से पहले उसके अधिकारों की जानकारी देना और गिरफ्तारी का कारण बताना जरूरी होता है, लेकिन उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। साथ ही गिरफ्तारी के दौरान निर्धारित प्रक्रियात्मक नियमों की भी अनदेखी की गई, जो इसे अवैध बनाता है।
ऐसे सामने आया था घोटाला
20 मई 2025 को IAS विनय चौबे और तत्कालीन संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह को ACB ने 38 करोड़ रुपये के शराब घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया था। इससे पहले छत्तीसगढ़ में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद, झारखंड ACB ने 2024 में प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज की थी। आरोप प्रमाणित होने के बाद विजिलेंस विभाग ने कांड संख्या 9/2025 के तहत मामला दर्ज किया।
छत्तीसगढ़ मॉडल से कैसे हुआ नुकसान?
झारखंड सरकार ने 2022 में नई उत्पाद नीति लागू की, जो छत्तीसगढ़ के मॉडल पर आधारित थी। इस नीति के तहत राज्य में छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट का वर्चस्व बढ़ा और थोक शराब की बिक्री इन्हीं के हाथों में सौंपी गई। देसी और विदेशी शराब के ठेके एक खास सिंडिकेट को दिए गए, जिसके बदले उच्च अधिकारियों को मोटी रिश्वत दी गई। इस पूरे घोटाले से राज्य को लगभग 38 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ।
अब तक पांच गिरफ्तारियां
इस शराब घोटाले मामले में अब तक पांच लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अधिकारियों के साथ-साथ शराब कारोबार से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
तीन आरोपितों को दो दिनों की पुलिस रिमांड
शराब घोटाला मामले के तीन आरोपितों सुधीर कुमार दास, सुधीर कुमार और नीरज कुमार सिंह 12 जून से दो दिनों की पुलिस रिमांड पर होंगे। एसीबी की टीम इनसे दो दिनों तक पूछताछ करने के बाद 14 जून को एसीबी कोर्ट में पेश करेगी। एसीबी की ओर से इन तीनों से पूछताछ के लिए चार दिनों की रिमांड मांगी गई थी, लेकिन कोर्ट ने दो दिन की ही अनुमति प्रदान की है। दरअसल, 21 मई को पूर्व जीएम फाइनेंस सुधीर कुमार दास, जीएम सुधीर कुमार और कर्मचारी नीरज कुमार सिंह को एसीबी की टीम ने गिरफ्तार किया गया था। नीरज कुमार सिंह प्लेसमेंट एजेंसी का कर्मचारी है।
विनय कुमार सिंह के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी
इस मामले में आरोपित कारोबारी विनय कुमार सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की विशेष अदालत ने गिरफ्तारी वारंटी जारी किया है। एसीबी ने विशेष अदालत में आवेदन देकर विनय कुमार सिंह के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आग्रह किया था। दरअसल, विनय कुमार सिंह नोटिस करने के बाद भी एसीबी के समक्ष उपस्थित नहीं हो रहा है। विनय सिंह को इस मामले में अपनी गिरफ्तारी का डर सता रहा है। हालांकि उससे बचाने के लिए उसने 29 मई को एसीबी कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है, जिसपर 20 जून को सुनवाई होनी है। इस मामले में एसीबी ने अबतक निलंबित आईएएस विनय चौबे सहित पांच को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

