नई दिल्ली : बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री Rabri Devi, उनकी बेटियों मीसा भारती, हेमा यादव समेत अन्य की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ईडी ने मंगलवार को रेलवे की नौकरी के बदले जमीन से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में पहला आरोप पत्र दाखिल किया है, जिसमें बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री Rabri Devi, मीसा भारती और हेमा यादव के साथ ही हृदयानंद चौधरी, एके इंफोसिस्टम्स फर्म के प्रमोटर और लालू यादव के करीबी कारोबारी अमित कात्याल को आरोपी बनाया गया है।
ईडी द्वारा दाखिल चार हजार 751 पन्नों के आरोपपत्र पर राउज एवेन्यू कोर्ट 16 जनवरी को संज्ञान लेगा। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने ईडी को मंगलवार को आरोपपत्र और दस्तावेजों की ई-प्रति दाखिल करने का निर्देश दिया। ईडी के विशेष लोक अभियोजक मनीष जैन और अधिवक्ता इशान बैसला ने अदालत को बताया कि राबड़ी देवी के परिवार के सदस्य अपराध की आय के लाभार्थी हैं।

Rabri Devi: अमित कात्याल को ईडी ने 11 नवंबर को गिरफ्तार किया
ईडी ने अमित कात्याल को 11 नवंबर 2023 को गिरफ्तार किया था। वहीं सीबीआई ने तीन जुलाई, 2023 को दायर अपने दूसरे आरोपपत्र में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी सह बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री Rabri Devi, बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पश्चिम मध्य रेलवे के तत्कालीन जीएम, डब्लूसीआर के दो सीपीओ सहित 17 लोगों को आरोपी बनाया था।
क्या है मामला
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव पर वर्ष 2004 से 2009 के दौरान रेल मंत्री रहते हुए मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित पश्चिमी मध्य क्षेत्र में हुई रेलवे की ग्रुप डी भर्तियों से जुड़ा है। इस मामले में सीबीआई ने लालू यादव समेत अन्य आरोपियों पर अभ्यर्थियों से जमीन लेकर नौकरी देने का आरोप लगाया है। सीबीआई ने जमीन के बदले नौकरी घोटाले में 18 मई 2022 को मुकदमा दर्ज किया था और जुलाई 2022 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के ओएसडी भोला
प्रसाद को गिरफ्तार किया था।
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