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हेमंत ने ममता को दिया न्यौता, अतिथियों की सूची में दीदी का नाम सबसे ऊपर

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 28 नवंबर को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में केवल ममता बनर्जी को ही नहीं, बल्कि इंडिया गठबंधन के सभी मुख्यमंत्रियों से भी शामिल होने का अनुरोध किया है।

by Rakesh Pandey
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रांची/कोलकाता: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 28 नवंबर को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। खास बात यह है कि इस बार उनका शपथ ग्रहण समारोह राजभवन में नहीं, बल्कि जनता के सामने खुले स्थान पर होगा। इस समारोह में प्रमुख अतिथियों के रूप में शपथ ग्रहण के लिए बुलाए गए नामों की सूची को अंतिम रूप दिया गया है, जिसमें बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम सबसे ऊपर है।

बंगाल और झारखंड के बीच मजबूत रिश्ते

बंगाल और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और ममता बनर्जी के बीच हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं। दोनों राज्यों की सरकारों ने मिलकर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए कई बार साझा रणनीतियों पर काम किया है। यही कारण है कि शपथ ग्रहण समारोह में ममता दीदी को आमंत्रित किया गया है, ताकि दोनों राज्यों के रिश्ते और मजबूत हो सकें।

इंडिया गठबंधन की एकजुटता को बढ़ावा

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केवल ममता बनर्जी को ही नहीं, बल्कि इंडिया गठबंधन के सभी मुख्यमंत्रियों से भी समारोह में शामिल होने का अनुरोध किया है। इसका उद्देश्य न केवल राज्य की एकता को बढ़ावा देना है, बल्कि भारतीय राजनीति में विपक्षी एकता को भी मजबूती देना है।

एक नए अध्याय की शुरुआत

हेमंत सोरेन के लिए यह शपथ ग्रहण समारोह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। झारखंड में भाजपा को पीछे छोड़कर सत्ता में वापसी करने के बाद सोरेन की यह शपथ ग्रहण समारोह राज्य की राजनीति के लिए एक नया अध्याय शुरू करने जैसा है। ममता बनर्जी जैसे महत्वपूर्ण नेता का शपथ ग्रहण में शामिल होना इस अवसर को और भी खास बना देता है।

समारोह की तैयारियां जोरों पर

शपथ ग्रहण समारोह के आयोजन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इसके लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और राज्य के प्रमुख राजनीतिक नेता, अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता समारोह में उपस्थित होंगे। यह समारोह राज्य की राजनीति और राज्यवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण घटना साबित हो सकता है। हेमंत सोरेन की यह दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ है और इस बार उनके नेतृत्व में झारखंड में विपक्षी गठबंधन की शक्ति को और मजबूती मिलने की संभावना है।

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