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Jharkhand inhuman act : बंद कमरे में कराहती व प्लास्टिक चबाती रही मां, महाकुंभ में पुण्य के बजाय महापाप बटोरते रहे बेटा-बहू, क्या है पूरी घटना-पढ़ें

by Anand Mishra
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रामगढ़ : झारखंड के रामगढ़ जिला स्थित अरगड़ा क्षेत्र में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक बेटा अपनी वृद्ध मां को घर में बंद कर महाकुंभ के स्नान के लिए प्रयागराज चला गया। वृद्धा संजू देवी, जो 65 साल की हैं, घर में अकेले दो दिन तक भूख और प्यास से तड़पती रही। उसकी कराहने और चिल्लाने की आवाजें पड़ोसियों तक पहुंचीं, जिन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए घर का ताला तोड़ा और वृद्ध महिला को बाहर निकाला, जिससे उसकी जान बचाई जा सकी।

दो दिन तक तड़पती रही वृद्धा, जान पर बन आई

घटना के अनुसार, सीसीएल कर्मचारी अखिलेश कुमार अपनी पत्नी और बच्चों के साथ प्रयागराज महाकुंभ स्नान के लिए निकल पड़ा था। उसने अपनी बीमार मां संजू देवी को घर में बंद कर दिया था। घर में दो दिन तक संजू देवी को कोई खाना नहीं मिला, और वह भूख के मारे प्लास्टिक चबाती रही। तीसरे दिन जब उनका धैर्य टूट गया, तो उनके चीखने की आवाज़ें बाहर तक पहुंचीं। पड़ोसियों ने महिला के रिश्तेदारों को सूचना दी और फिर रामगढ़ थाना में जाकर मां को बाहर निकालने की गुहार लगाई।

पड़ोसियों की मदद से ताला तोड़कर बाहर निकाली गई महिला

पड़ोसियों और रिश्तेदारों की मदद से पुलिस ने घर का ताला तोड़ा और संजू देवी को बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें पानी और खाना दिया गया। संजू देवी अपने शरीर में बहुत कमजोर थीं और उनके पैरों में घाव थे, जिससे वह ठीक से चल भी नहीं पा रही थीं। उनके लिए यह वाकई एक कठिन समय था। जैसे ही उनकी बेटी चांदनी ने उन्हें देखा, वह उनसे लिपट पड़ीं। इसके बाद संजू देवी को बेटी के साथ ससुराल भेजा गया, जहां उनके घावों का इलाज किया गया।

बेटे का तर्क – मां से सहमति लेकर गया था कुंभ

अखिलेश कुमार ने मोबाइल पर अपनी सफाई देते हुए कहा कि वह अपनी मां को कुंभ में साथ नहीं ले गया क्योंकि वह वृद्ध थीं और उन्हें परेशानी हो सकती थी। उन्होंने कहा कि वह मां को खाना देकर गया था और यह भी कहा कि मां की सहमति से ही उनका ख्याल रखा गया था। हालांकि, इस प्रकार की स्थिति पैदा होने की उम्मीद उन्हें नहीं थी।

कानून के जानकारों का कहना – यह प्रताड़ना का मामला

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी को कमरे में बंद कर बाहर जाना और उसे न खाने-पीने की चीजें देना, यह गैर-कानूनी है। यह न केवल मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह मानसिक और शारीरिक यातना भी है। इस मामले में बेटे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। यह प्रताड़ना का मामला बन सकता है और जान से मारने की कोशिश के तहत भी केस दर्ज किया जा सकता है।

पुलिस ने कार्रवाई का भरोसा दिया

रामगढ़ के पुलिस अधीक्षक अजय कुमार ने इस घटना को बेहद अमानवीय और शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि महिला को अकेले छोड़ कर जाने के बजाय किसी देखभाल करने वाले व्यक्ति को जिम्मेदारी देना चाहिए था। पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और जल्द ही आरोपी पर कार्रवाई की जाएगी।

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