VIVEK SHARMA
रांची : राजधानी में कुत्तों का आतंक है। हर दिन ये लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हर दिन सदर में एंटी रेबीज वैक्सीन लगाने के लिए 200 से अधिक लोग पहुंच रहे हैं। इनमें कई मामले फॉलो अप के भी होते हैं। जबकि 100 नए केस होते है जो वैक्सीन की डोज लेने के लिए पहुंचते हैं। वहीं पूरे महीने की बात करें तो हर महीने 6,000 से ज्यादा लोग वैक्सीन लगाने के लिए आ रहे हैं। किसी महीने में ये आंकड़ा 7500 को भी पार कर गया है।
रेबीज से बचाव के लिए वैक्सीन जरूरी
कुत्ते के काटने के बाद अगर रेबीज हो जाए तो 100% मृत्यु दर होती है। ऐसे में जरूरी है कि लोग कुत्ते के काटने को नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से इलाज करवाए। डॉक्टरों की माने तो रेबीज से बचने के लिए समय रहते इलाज करवाना और एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन कोर्स पूरा करना जरूरी है।
बढ़ रहा है तेजी से आंकड़ा
अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डाले तो दिसंबर 2024 में 6,655 एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए गए। इसके बाद जनवरी 2025 में 7,518 और इंजेक्शन लगाए गए। हालांकि फरवरी और मार्च के डेटा को को अभी कंपाइल नहीं किया गया है। लेकिन आंकड़े बता रहे हैं कि डॉग बाइट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में रेबीज के होने का खतरा भी अधिक है। सदर अस्पताल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ बिमलेश सिंह ने बताया कि अब हमारे यहां कभी एंटी रेबीज वैक्सीन की कमी नहीं होती। ऐसा सिस्टम बनाया गया है कि स्टॉक खत्म होने से पहले वैक्सीन मंगा ली जाती है।
इन लक्षणों पर दे ध्यान
रेबीज के लक्षण आमतौर पर बुखार, थकान और सिरदर्द जैसे फ्लू जैसे लक्षणों से शुरू होते हैं। इसके बाद वायरस के बढ़ने पर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं होती हैं। काटने के स्थान और वायरस की मात्रा के आधार पर कुछ दिनों से लेकर एक वर्ष से अधिक तक व्यापक रूप से असर होता है। मस्तिष्क के करीब काटने से अक्सर लक्षण जल्दी शुरू होते हैं। शुरुआती लक्षणों में काटने वाली जगह पर झुनझुनी या खुजली शामिल हो सकती है। जबकि एडवांस स्टेज में बेचैनी, निगलने में कठिनाई, मतिभ्रम, दौरे और यहां तक कि पक्षाघात भी हो सकता है।
कुत्ते के काटने पर क्या करें
कुत्ते के काटने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोएं। कुत्ते या जानवर के काटने के तुरंत बाद डॉक्टर से सहायता लें। एंटी-रेबीज टीकाकरण का पूरा कोर्स लें। पालतू जानवरों को भी एंटी रेबीज का टीका लगवाएं। जानवरों के साथ काम करते समय सुरक्षा को लेकर इंतजाम करें।
इमरजेंसी में रिम्स में मिल रही एक डोज
इमरजेंसी में रिम्स में एंटी रेबीज की एक डोज लगाई जा रही है। इसके बाद बाकी के 4 डोज सदर अस्पताल में ही लगाए जाते हैं। ऐसे में रांची व आसपास से भी लोग वैक्सीन लगाने सदर अस्पताल ही पहुंचते हैं। वहीं अब मोहल्ला क्लिनिक में भी वैक्सीन देने की व्यवस्था की जा रही है। जिससे कि लोग अपने घरों के पास ही वैक्सीन लगा सकते हैं।
इन बातों को नजरअंदाज न करें
- जानवरों के काटने या खरोंच लगने पर भी उसे नज़रअंदाज़ न करें
- उपचार में देरी न करें
- घाव को धोने के बाद उसे कसकर न ढकें
- डॉक्टर से सलाह लिए बिना कुत्ता काटने के बाद खुद से इलाज करने की कोशिश न करें।
- जानवरों को न छेड़ें और न ही उन्हें चिढ़ाए
- एंटी-रेबीज वैक्सीन की खुराक पूरी लें।

