खूंटी : झारखंड के खूंटी जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति को मृत समझकर उसका अंतिम संस्कार तक कर दिया गया, लेकिन कुछ दिनों बाद वही व्यक्ति जिंदा घर लौट आया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और ग्रामीणों के बीच चर्चा का माहौल बन गया।
क्या है मामला
मामला मारंगहादा थाना क्षेत्र के पतरा टोली गांव का है। यहां ग्रामीणों और परिजनों ने एक अज्ञात शव को गांव के निवासी विश्राम मुंडा समझकर सामाजिक रीति-रिवाज के साथ दफना दिया था। बाद में जब विश्राम मुंडा खुद घर लौटे तो परिवार और गांव के लोग हैरान रह गए।
नाली से मिला था अज्ञात शव
जानकारी के अनुसार, 11 मई को खूंटी थाना क्षेत्र के डडगामा गांव के पास एक नाली से अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ था। पुलिस शव की पहचान कराने में जुटी थी। इसी दौरान विश्राम मुंडा के परिजन और ग्रामीण पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और शव की पहचान विश्राम मुंडा के रूप में कर दी। पहचान के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद गांव में पूरे सामाजिक रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार कर शव को दफना दिया गया।
शादी समारोह से लापता हुए थे विश्राम मुंडा
बताया गया कि विश्राम मुंडा 10 मई को अपने परिवार के साथ डडगामा गांव में आयोजित एक शादी समारोह में गए थे। वहीं से वे अचानक लापता हो गए। काफी तलाश के बाद भी जब उनका कोई पता नहीं चला तो परिजनों ने थाने में गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई। इसी दौरान नाली से मिले शव की तस्वीर सामने आई। ग्रामीणों और परिवार वालों ने तस्वीर देखकर उसे विश्राम मुंडा समझ लिया। बताया गया कि मृतक का चेहरा काफी हद तक विश्राम मुंडा से मिलता-जुलता था, जिसके कारण यह भ्रम पैदा हो गया।
जिंदा लौटते ही गांव में मची सनसनी
घटना ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब अंतिम संस्कार के कुछ दिन बाद विश्राम मुंडा अचानक जिंदा घर लौट आए। वे सीधे खूंटी में अपनी बेटी के किराए के मकान पहुंचे। उन्हें सामने देखकर परिवार के सदस्य स्तब्ध रह गए। देखते ही देखते यह खबर पूरे गांव और आसपास के क्षेत्रों में फैल गई। ग्रामीणों में अफरातफरी का माहौल बन गया और पंचायत स्तर पर बैठक बुलाई गई।
पंचायत ने सार्वजनिक रूप से मांगी माफी
मामले की जानकारी मिलने के बाद ग्राम सभा सक्रिय हुई। पंचायत के मुखिया प्रेम तुती ने बताया कि शव की पहचान फोटो के आधार पर की गई थी। चेहरा काफी मिलता-जुलता होने के कारण ग्रामीण और परिजन भ्रमित हो गए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस गलती के लिए माफी मांगते हुए कहा कि यह भूल अनजाने में हुई है। ग्राम प्रधान जोलेन तूती ने भी माना कि जल्दबाजी में शव की पहचान कर ली गई थी।
रामगढ़ घूमने चले गए थे विश्राम मुंडा
जिंदा लौटे विश्राम मुंडा ने बताया कि वे बिना किसी को जानकारी दिए रामगढ़ घूमने चले गए थे। उन्होंने परिवार को अपने जाने की सूचना नहीं दी थी, जिसके कारण सभी लोग परेशान हो गए। विश्राम मुंडा ने भी इस पूरी घटना पर दुख जताया और कहा कि उनकी वजह से गांव और परिवार को परेशानी उठानी पड़ी।
अब होगी अज्ञात शव की दोबारा पहचान
मामले पर एसडीपीओ वरुण रजक ने कहा कि जिस शव को विश्राम मुंडा समझकर दफनाया गया था, उसकी दोबारा पहचान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि एफएसएल टीम आवश्यक साक्ष्य जुटा चुकी है। यदि कोई व्यक्ति शव की पहचान के लिए सामने आता है तो डीएनए जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के अनुसार, कानून के तहत 72 घंटे तक पहचान नहीं होने पर अज्ञात शव का अंतिम संस्कार करना अनिवार्य होता है।

