रांची : झारखंड प्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन ने राज्य परिवहन प्राधिकार (एसटीए) और क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार (आरटीए) के कामकाज में लंबे समय से बनी ठप स्थिति को लेकर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और परिवहन सचिव के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। एसोसिएशन का कहना है कि परमिट जारी नहीं होने और लंबित मामलों के निष्पादन में देरी से बस संचालक गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सच्चिदानंद सिंह और महासचिव प्रदीप कुमार ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 और झारखंड मोटर वाहन नियमावली, 2001 के तहत गठित राज्य परिवहन प्राधिकार एवं क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार का नियमित संचालन लंबे समय से प्रभावित है। इसके कारण नई बसों के परमिट जारी नहीं हो पा रहे हैं। इसके साथ ही परमिट नवीकरण, अंतरण और बस प्रतिस्थापन जैसे मामलों का भी निष्पादन लंबित है।
बस संचालकों का कहना है कि परिवहन विभाग से कई बार आग्रह के बावजूद व्यवस्था सामान्य नहीं हो सकी है। इसका असर राज्यभर के बस व्यवसाय से जुड़े लोगों पर पड़ रहा है। कई बसें परिचालन के अभाव में खड़ी हैं, जबकि संचालकों को टैक्स, बीमा प्रीमियम और फाइनेंस कंपनियों की किस्तों का भुगतान लगातार करना पड़ रहा है। एसोसिएशन ने कहा कि बढ़ते आर्थिक बोझ के कारण बस संचालकों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। कई संचालक आर्थिक तंगी और मानसिक दबाव से जूझ रहे हैं।
बस संचालकों ने सरकार से राज्य परिवहन प्राधिकार और क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार का नियमित संचालन जल्द शुरू कराने तथा लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करने की मांग की है।

