
नई दिल्ली : आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू (N Chandrababu Naidu) की दिल्ली यात्रा इस सप्ताह के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण बैठकों का हिस्सा है, जिनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात प्रमुख है। यह बैठक न केवल राज्य के प्रशासनिक मामलों पर केंद्रित होगी, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बैठक
मुख्यमंत्री नायडू की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मंगलवार दोपहर को प्रस्तावित बैठक में राज्य के प्रशासनिक मामलों पर चर्चा होने की संभावना है। विशेष रूप से, आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत लंबित वादों और राज्य के विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
राज्यसभा की रिक्ति और भाजपा की रणनीति
कुछ महीने पहले, आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सदस्य विजय साई रेड्डी के इस्तीफे के बाद एक सीट रिक्त हुई थी। इस रिक्ति को भरने के लिए चुनाव की अधिसूचना जारी की गई है और नामांकन की अंतिम तिथि 29 अप्रैल निर्धारित की गई है। इस चुनाव में भाजपा की ओर से के. अन्नामलाई के नाम की चर्चा है, जो तमिलनाडु से केंद्रीय राजनीति में आए हैं।
पोलावरम परियोजना पर जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से बैठक
मुख्यमंत्री नायडू की जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से प्रस्तावित बैठक में पोलावरम परियोजना की प्रगति और इसके लिए आवश्यक केंद्रीय सहायता पर चर्चा की जाएगी। यह परियोजना आंध्र प्रदेश के जल संसाधन प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से मुलाकात
मुख्यमंत्री नायडू केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से भी मुलाकात करेंगे। इस बैठक में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत लंबित वादों और राज्य के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर चर्चा की जाएगी।
TDP और BJP गठबंधन की राजनीतिक पृष्ठभूमि
तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) 2014 से 2018 तक केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा थी। हालांकि, 2018 में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत वादों के न पूरे होने के कारण टीडीपी ने गठबंधन तोड़ दिया। 2024 के आम चुनावों से पहले, टीडीपी ने फिर से एनडीए से गठबंधन किया और राज्य में गठबंधन सरकार का हिस्सा बना।
मुख्यमंत्री नायडू की दिल्ली यात्रा और उनकी केंद्रीय नेताओं से प्रस्तावित बैठकें आंध्र प्रदेश की राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती हैं। इन बैठकों के परिणाम राज्य के विकास और राजनीतिक समीकरणों पर दूरगामी प्रभाव डाल सकते हैं।

