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Saranda IED Blast : एक महिला की मौत, दो महिलाएं गंभीर रूप से घायल

Saranda IED Blast : पेड़ के पत्ते व सूखी लकड़ी चुनने गई थीं तीनों, कच्ची सड़क के नीचे लगा था विस्फोटक

by Rajeshwar Pandey
Saranda forest area IED blast killed one woman and injured two others
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चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में शुक्रवार को नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी में विस्फोट हो गया, जिसमें एक महिला ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दो की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। यह घटना जराइकेला थाना क्षेत्र के कोलबोंगा इलाके में हुई है।

घटना के संबंध में जानकारी मिली है कि तीनों महिलाएं रोज की तरह पत्ता और सूखी लकड़ी चुनने के लिए जंगल की ओर गई थीं। इसी दौरान कच्ची सड़क पर नक्सलियों द्वारा प्लांट किए गए आईईडी बम में जोरदार धमाका हो गया। विस्फोट की चपेट में आने से तीनों महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं।

पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक अमित रेणु ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि जंगल से विस्फोट की सूचना प्राप्त होते ही तुरंत प्रशासनिक और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। उन्होंने संबंधित सीडीपीओ को घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, इलाके में नक्सल विरोधी अभियान को तेज करते हुए बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है। फूलो धनवार (18) नामक महिला की मौत हुई है, जबकि सलामी कंडुलना (28) और बरसी धनवार (35) की हालत नाजुक बताई जा रही है।

इलाके में दोबारा नक्सली खौफ, सुरक्षा बलों की चुनौती बढ़ी

सारंडा के जिस क्षेत्र में यह विस्फोट हुआ, वहीं कुछ दिनों पहले नक्सलियों ने सड़क अवरुद्ध करने के लिए पेड़ गिराकर क्षेत्र में दहशत फैलाने की कोशिश की थी। सारंडा के कई इलाकों में माओवादी गतिविधियां लगातार बनी हुई है। नक्सली अपनी मौजूदगी जताने के लिए समय-समय पर आईईडी ब्लास्ट और अन्य विध्वंसकारी घटनाएं अंजाम दे रहे हैं। जहां छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों की लगातार सफल कार्रवाई से नक्सलवाद कमजोर पड़ रहा है, वहीं झारखंड के सारंडा में माओवादी अभी भी सक्रिय हैं।

सुरक्षा बलों के मुताबिक इलाके में कई बड़े इनामी माओवादी नेता अभी भी छिपे हुए हैं और उन्हें पकड़ने के लिए अभियान जारी है। नक्सलियों द्वारा जगह-जगह आईईडी प्लांट किए जाने से आम ग्रामीण, यहां तक कि जानवर भी इनकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा रहे हैं। इससे क्षेत्र में लगातार दहशत का वातावरण बना हुआ है। स्थानीय लोग हमेशा जान-माल के खतरे के साए में जीने को मजबूर हैं।

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