Dhanbad : चंबल एक्सप्रेस में 11 मार्च को एक घटना हुई थी, जिसमें प्रसाद खाने के बाद महिला यात्री की मौत हो गई थी। इस मामले में रेलवे पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने सात अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो साधु बनकर यात्रियों को प्रसाद के नाम पर जहर बांटते थे।
उस दिन पति के साथ धनबाद से बांदा जा रही 30 वर्षीय शिवानी जनरल डिब्बे में बैठी थी। इसी दौरान साधु के वेश में एक शख्स ने उसे प्रसाद के रूप में लड्डू दिया। महिला ने भरोसा करके लड्डू खा तो लिया, लेकिन कुछ ही देर में वह बेहोश हो गई।
बेहोशी की हालत में ही तथाकथित अपराधी महिला का पर्स, रुपये और चांदी के गहने ले भागे। पति ने किसी तरह बांदा स्टेशन पर उतरकर पत्नी को अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन वहां भी चार दिन बाद इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई।
बांदा के जीआरपी थाने में दर्ज कराया गया था केस
इस घटना के बाद पति ने बांदा के जीआरपी थाने में मामला दर्ज कराया। मामला गोमो- कोडरमा के बीच का था, इसलिए केस कोडरमा जीआरपी को भेज दिया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपराध आसूचना शाखा धनबाद ने सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू किया, तो धनबाद रेलवे स्टेशन के एक फुटेज में एक साधु संदिग्ध गतिविधि करते देखा गया। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि वह अकेला नहीं था, बल्कि सात लोगों का गिरोह था।
आसनसोल और वर्धमान के सीसीटीवी फुटेज में पांच साधु एक साथ ट्रेन में चढ़ते दिखे, जबकि दो अन्य अलग स्टेशन पर सवार हुए थे।
लोकल ट्रेन से पहुंचे थे काली पहाड़ी स्टेशन
आगे की जांच में पता चला कि सभी अपराधी पहले लोकल ट्रेन से कालीपहाड़ी स्टेशन पहुंचे और वहां से अलग-अलग स्टेशनों के जरिए चंबल एक्सप्रेस में सवार हो गए। दीनदयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन पर सभी सातों आरोपी ट्रेन से उतरते देखे गए और वहां से बनारस कैंट होते हुए लखनऊ की ओर निकल गए।
मामले को सुलझाने के लिए आईपीएफ-सीआईबी धनबाद के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई। टीम ने लखनऊ, सुल्तानपुर और मुसाफिरखाना तक सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर जांच जारी रखी। अंत में अमेठी जिले के निहालगढ़ क्षेत्र में इनका सुराग मिला। पता चला कि यहां इस तरह के ढोंगी साधु रहते हैं।
मोबाइल लोकेशन के जरिए अपराधियों की मौजूदगी आसनसोल में ट्रेस की गई। टीम ने वहां पहुंचकर कालीपहाड़ी इलाके में अस्थायी रूप से रह रहे अपराधियों की पहचान की गई, फिर सतर्कता के के साथ सभी सातों अपराधियों को ट्रेन में पीछा करते हुए 31 मार्च को कोडरमा में गिरफ्तार कर लिया गया।
मंगता जाति से हैं सभी आरोपी
पूछताछ में खुलासा हुआ है कि सभी आरोपी मंगता जाति से हैं और ये लोग कभी साधु तो कभी फकीर बनकर ट्रेन और गांवों में घूमते थे। भोले-भाले लोगों को झांसा देकर प्रसाद खिलाकर लूटपाट करना इनका पेशा था।
बरामद की गई नशीली दवा
पुलिस ने अपराधियों के पास से नशीली दवा (अल्प्राजोलम), ताबीज, जंतर, रुद्राक्ष माला, कमंडल, मोबाइल फोन, रुपये समेत कई सामान बरामद किए हैं। धूमी, रज्जाक जोगी, राजू, पहाड़ी, कृपाल, सुनील और मूला उर्फ रामचंद्र (अमेठी, उत्तर प्रदेश) के निवासी हैं।
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