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अनुसूचित जाति की नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में दोषी को आजीवन सश्रम कारावास व एक लाख रुपये अर्थदंड

जिला व्यवहार न्यायालय गढ़वा के विशेष न्यायाधीश पोक्सो कोर्ट दिनेश कुमार की अदालत ने सुनाई है सजा।

by Reeta Rai Sagar
Garhwa High court
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Garhwa (Jharkhand): झारखंड के गढ़वा जिला व्यवहार न्यायालय गढ़वा के विशेष न्यायाधीश पोक्सो कोर्ट दिनेश कुमार की अदालत ने शुक्रवार को अनुसूचित जाति की एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में रंका थाना क्षेत्र के सिरोइकला गांव के बघौता टोला निवासी विकास साव उर्फ विकास कुमार को सश्रम आजीवन कारावास एवं एक लाख रुपए आर्थदंड की सजा सुनाई है। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक उमेश दीक्षित एवं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता ललित कुमार पांडेय ने पैरवी की।

पंचायत में नहीं निकला था कोई समाधान

जानकारी के अनुसार रंका थाना क्षेत्र के एक गांव की अनुसूचित जाति की एक नाबालिग लड़की की मां ने 16 जनवरी 2023 को लिखित आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया गया था कि विकास साव ने उनकी नाबालिग पुत्री के साथ 14 जनवरी 2023 की दोपहर लगभग 3:00 बजे दुष्कर्म किया। उसके बाद जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए हल्ला करने या किसी को बताने पर मार कर फेंक देने की धमकी दी। सूचक ने बताया था कि इसके बाद 15 जनवरी 2023 को गांव में पंचायत हुई। लेकिन, कोई समाधान नहीं निकला। इस कारण प्राथमिकी दर्ज कराने में विलंब हुआ। पुलिस ने इस जानकारी के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर नाबालिग पीड़िता का मेडिकल एवं न्यायालय में बयान दर्ज कराया।

आरोपी ने घर में ले जाकर किया था दुष्कर्म

पीड़िता ने बताया था कि वह सड़क के किनारे बैठी थी, तभी विकास साव उर्फ विकास कुमार ने आकर कहा कि तुम हमेशा इधर आती हो, चलो मेरे घर में। इस पर पीड़िता उसके घर गई तो आरोपी ने उसे अपने घर में ले जाकर दरवाजा बंद कर दुष्कर्म किया। इस दौरान पीड़िता का मुंह कपड़े से बंद कर दिया। पीड़िता ने बताया था कि उसकी मम्मी बीमार थी और पापा गाय को पानी पिलाने गए थे। जब उसके पिता घर वापस आए तो बेटी के बारे में पूछा। उन्हें पता चला कि वह सड़क की ओर गई है। लेकिन, पीड़िता के पिता की आवाज सुनकर आरोपी ने उसे को छोड़ दिया। इसके बाद वह भाग कर घर पहुंची और घटना की जानकारी अपने माता-पिता को दी।

नौ लोगों की गवाही व साक्ष्य के आधार पर आरोपी पाया गया दोषी

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करते हुए न्यायिक हिरासत भेज दिया और न्यायिक प्रक्रिया पूरी कर आरोप पत्र समर्पित किया। न्यायालय ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए आरोप गठन कर विभिन्न तिथियों में कुल नौ लोगों की गवाही कलमबद्ध करते हुए साक्ष्य के आधार आरोपी विकास साव को दोषी करार दिया।

विभिन्न धाराओं के तहत कारावास एवं अर्थदंड

अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए अलग-अलग धाराओं में एससी-एसटी एक्ट 3(2)(v)) में सश्रम आजीवन कारावास एवं 10000 रुपये आर्थदंड, 4(2)पोक्सो में 20 वर्ष सश्रम कारावास एवं एक लाख रुपये आर्थदंड, 3(1)(डब्ल्यू)(1(11) एससी-एसटी एक्ट में तीन वर्ष कारावास एवं 5000 रुपये आर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने जुर्माना की राशि जमा होने पर पीड़िता को देने का आदेश दिया है।

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