RANCHI: झारखंड को 2030 तक रेबीज मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इसे लेकर नेशनल हेल्थ मिशन झारखंड के एमडी शशि प्रकाश झा ने 13 फरवरी को सभी जिलों के सिविल सर्जनों को पत्र जारी कर एनिमल बाइट मैनेजमेंट और पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस को लेकर सख्त दिशा-निर्देश दिए हैं।

उन्होंने राज्य के सभी डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटलों को मॉडल एंटी रेबीज क्लिनिक के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया है। इन क्लिनिकों में विशेष वाउंड वाशिंग एरिया बनाया जाएगा, जहां कुत्ते या अन्य जानवर के काटने की स्थिति में घाव को कम से कम 15 मिनट तक बहते पानी और साबुन से धोने की व्यवस्था होगी।
स्वास्थ्य केंद्रों में वैक्सीन और सीरम
अभियान के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक एंटी रेबीज वैक्सीन और एंटी रेबीज सीरम की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। वन हेल्थ अप्रोच के तहत ह्यूमन रेबीज को पूर्व में राज्य में नोटिफायबल डिजीज घोषित किया जा चुका है। अब डॉग बाइट के हर मामले की रिपोर्टिंग आईएचआईपी-आईडीएसपी पोर्टल पर अनिवार्य होगी।
प्रोटोकॉल के तहत खुराक जरूरी
नए टीकाकरण प्रोटोकॉल के तहत इंट्रा-डर्मल रूट से 0.1 मिली की खुराक 0, 3, 7 और 28वें दिन दी जाएगी। गंभीर मामलों में डॉक्टरों की सलाह पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन का उपयोग सुनिश्चित करने को कहा गया है। इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता रथ भी रवाना किए हैं, जो अगले दो महीनों तक विभिन्न जिलों में लोगों को जागरूक करेंगे। नगर निकायों, पंचायती राज संस्थाओं और स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से स्कूलों और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इसके अलावा सभी सीएस को हॉस्पिटलों में तैनात मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया गया है।

