RANCHI: गैस सिलेंडर की सप्लाई में आ रही दिक्कतों के बीच करीब 40 साल पुराना दौर एक बार फिर लौट आया है। अब घरों से लेकर होटल और रेस्टोरेंट तक में कोयले वाले चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ गई है। कभी पुराने जमाने की पहचान ये चूल्हे अब आधुनिक जरूरतों के बीच एक सस्ता और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभर रहे हैं। बाजार में कोयले के चूल्हों की कई वैरायटी उपलब्ध हैं। पारंपरिक मिट्टी और लोहे के चूल्हों के साथ-साथ अब डिजाइनर और पोर्टेबल चूल्हे भी मिल रहे हैं, जिन्हें आसानी से कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है। दुकानदारों के अनुसार पिछले एक महीने में इनकी बिक्री में काफी बढ़ोतरी हुई है। खासकर छोटे होटल, ढाबे और स्ट्रीट फूड विक्रेता बड़ी संख्या में इन चूल्हों की खरीदारी कर रहे हैं।
कीमत में बढ़ोतरी के बावजूद डिमांड
सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई के नए नियम ने आम लोगों पर सीधा असर डाला है। इसके अलावा कई जगहों पर समय पर सिलेंडर की सप्लाई नहीं हो पाने से भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में कोयले का चूल्हा एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आया है। यह सस्ता होने के साथ इसके लिए किसी सप्लाई चेन पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। हालांकि कोयले की कीमतों में उछाल के बावजूद बाजार में कोयला आसानी से उपलब्ध है। कोयला विक्रेताओं का कहना है कि मांग बढ़ने के साथ-साथ सप्लाई भी बनी हुई है, जिससे उपभोक्ताओं को ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही। हालांकि कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी जरूर देखी जा रही है। 20 किलो वाला कोयले की बोरी 350 रुपए में मिल रही है जो 250 में मिल जाती थी।
चूल्हे पर बने खाने का आता है अलग स्वाद
रेस्टोरेंट वालों का मानना है कि यह बदलाव सिर्फ आर्थिक कारणों से ही नहीं, बल्कि स्वाद और पारंपरिक तरीके से खाना पकाने की चाहत से भी जुड़ा हुआ है। कोयले पर बने खाने का स्वाद अलग और ज्यादा बेहतर माना जाता है। खासकर तंदूरी और अन्य व्यंजनों में। यही वजह है कि कई रेस्टोरेंट भी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कोयले के चूल्हों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। इसके साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। कोयले के इस्तेमाल से धुआं और प्रदूषण बढ़ने का खतरा रहता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
लकड़ी वाला चूल्हा भी आया बाजार में
गैस सिलेंडर संकट के बीच कोयले वाले चूल्हों की वापसी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जरूरत के समय पारंपरिक विकल्प ही सबसे ज्यादा काम आते हैं। आने वाले समय में भी बाजार में अपनी जगह बनाए रखता है या नहीं ये तो देखना होगा। कुछ लकड़ी वाले चूल्हे भी मार्केट में विकल्प के तौर पर उपलब्ध है। जिसमें आंच कम ज्यादा करने के लिए नॉब और पंखे लगे हुए हैं। इसकी भी काफी डिमांड बाजार में देखी जा रही है।

