रांची : झारखंड में जिन ग्रामीण मार्गों पर अब रेल सेवा उपलब्ध हो गई है, वहां भी मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना के तहत चल रहीं बसों में यात्रियों की संख्या घटने लगी है। इसे देखते हुए परिवहन विभाग ने ऐसे अधिसूचित ग्रामीण मार्गों का नया आकलन शुरू किया है, ताकि जरूरत के अनुसार बसों का संचालन तय किया जा सके। विभाग को कई माध्यमों से यह जानकारी मिल रही है कि राज्य में कई ऐसे रूट हैं, जहां पहले ग्राम गाड़ी योजना की बसें नियमित रूप से चल रही थीं, लेकिन रेल संपर्क शुरू होने के बाद यात्रियों की संख्या कम हो गई है। यात्री नहीं मिलने की वजह से बसों की सीटें खाली रहती हैं।
संचालकों को लगातार घाटा भी हो रहा है। ऐसे में अब इन मार्गों पर वर्तमान बस परिचालन की उपयोगिता की समीक्षा की जा रही है और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रहा है। सभी क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार और जिला परिवहन पदाधिकारी से ऐसे रूटों पर डिटेल रिपोर्ट भी मांगी जाएगी, जिन पर वाहनों का आवागमन तो हो रहा है, पर यात्री इतनी संख्या में नहीं मिल रहे हैं। इसका उद्देश्य यह है कि जहां मांग कम हो गई है वहां संसाधनों का नए सिरे से उपयोग किया जाए। जिन ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी सार्वजनिक परिवहन की जरूरत अधिक है, वहां बस सेवा को मजबूत किया जाए।
601 मार्गों पर 172 बसों का परिचालन
राज्य में मुख्यमंत्री ग्राम गाड़ी योजना के तहत 601 से अधिक मार्ग चिह्नित हैं, जिन पर फिलहाल 172 बसों का संचालन हो रहा है। यह निर्धारित लक्ष्य की तुलना में काफी कम है। बता दें कि इस योजना के तहत छात्र-छात्राओं, झारखंड आंदोलनकारियों, दिव्यांगजनों तथा 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को मुफ्त यात्रा सुविधा देने का प्रावधान है। लाभुकों की पहचान कर स्मार्ट कार्ड वितरण किया जाना है। वहीं, सामान्य यात्रियों से निर्धारित टिकट शुल्क लिया जाता है।
परिवहन सचिव ने 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट
परिवहन सचिव राजीव रंजन ने सभी क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकारों को अपने-अपने क्षेत्रों में नए ग्रामीण मार्गों की पहचान कर सेवा विस्तार सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को योजना का लाभ मिल सके। उन्होंने रेल संपर्क वाले क्षेत्र के रूट का भी आकलन करने का निर्देश दिया है। 15 दिनों में सारी जानकारी विभाग को उपलब्ध कराने को कहा गया है।

