रांची : झारखंड में अब गैर-लाभकारी और चैरिटेबल संस्थानों के लिए रियायती दर पर सरकारी जमीन हासिल करना आसान नहीं होगा। राज्य सरकार ने लीज बंदोबस्ती प्रक्रिया में संशोधन करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकारी भूमि लेने की इच्छुक संस्थाओं, समितियों और ट्रस्टों का आवेदन की तिथि से कम-से-कम तीन वर्ष पूर्व पंजीकृत होना अनिवार्य होगा।
इस संबंध में भू-राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। विभाग के अनुसार संशोधित प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं, जबकि पूर्व में जारी अन्य नियम एवं आदेश यथावत रहेंगे।
नई अधिसूचना के तहत शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं को रियायती दर पर सरकारी भूमि प्राप्त करने के लिए इंडियन ट्रस्ट एक्ट 1882, सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 अथवा कंपनी अधिनियम 2013 के तहत कम-से-कम तीन वर्ष पहले से पंजीकृत होना आवश्यक होगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि चैरिटेबल संस्थाओं की परिभाषा आयकर अधिनियम 1961 की धारा 2(15) के अनुसार तय की जाएगी।
सरकार का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य सरकारी जमीन के दुरुपयोग पर रोक लगाना और वास्तविक सामाजिक संस्थाओं को प्राथमिकता देना है। माना जा रहा है कि नए नियम लागू होने के बाद फर्जी अथवा केवल रियायती दर पर जमीन प्राप्त करने के उद्देश्य से गठित संस्थाओं पर रोक लगेगी। अब नई बनी संस्थाओं को तुरंत सरकारी जमीन नहीं मिल सकेगी, बल्कि उन्हें अपने कार्य और विश्वसनीयता का रिकॉर्ड प्रस्तुत करना होगा।

