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Jamshedpur News: MGM अस्पताल में अब नहीं चलेगी लीपापोती, हर मौत की लिखनी होगी साफ वजह

मेडिकल कॉलेज होने के कारण यहां पढ़ने वाले छात्रों को लागू होने वाले डेथ ऑडिट सिस्टम से वास्तविक केस स्टडी का डेटा मिलेगा। इससे उन्हें बीमारियों के पैटर्न और इलाज की बारीकियों को समझने में मदद मिलेगी।

by Mujtaba Haider Rizvi
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Jamshedpur : जमशेदपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ने स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब अस्पताल में किसी भी मरीज की मृत्यु होने पर उसका ठोस और स्पष्ट मेडिकल कारण दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है।अस्पताल प्रबंधन ने इसके लिए डेथ ऑडिट सिस्टम लागू किया है। पहले डाक्टर मरीज की मौत का स्पष्ट कारण नहीं लिखते थे। इस नई व्यवस्था के तहत बिना पुख्ता कारण के किसी भी मौत की रिपोर्ट स्वीकार नहीं की जाएगी।

ऑनलाइन प्रक्रिया अनिवार्य, विभागाध्यक्षों को निर्देश

अस्पताल प्रशासन ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि उनके विभाग में होने वाली हर मृत्यु का विस्तृत मेडिकल कारण ऑनलाइन दर्ज किया जाए। यदि रिपोर्ट अधूरी या अस्पष्ट होगी, तो सिस्टम उसे स्वीकार नहीं करेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य हर केस की गंभीरता से जांच करना और किसी भी संभावित लापरवाही की पहचान कर उसे दूर करना है।

विवाद कम होंगे, पारदर्शिता बढ़ेगी

अक्सर मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने पर मरीज के परिजनों और अस्पताल के बीच विवाद की स्थिति बन जाती है। डेथ ऑडिट सिस्टम लागू होने से परिजनों को मृत्यु का सटीक कारण मिलेगा, वहीं डॉक्टरों को भी सही दस्तावेजीकरण के कारण अनावश्यक आरोपों से राहत मिलेगी। इससे अस्पताल की कार्यप्रणाली में जिम्मेदारी और अनुशासन भी बढ़ेगा।

डिजिटल डेटा से मिलेगा भविष्य का आधार

यह सिस्टम डिजिटल डेटा तैयार करेगा, जिससे विभिन्न बीमारियों, इलाज के परिणाम और मृत्यु दर का विश्लेषण किया जा सकेगा। हार्ट अटैक, कैंसर, संक्रमण और मातृ-शिशु मृत्यु जैसे मामलों पर गहराई से अध्ययन संभव होगा, जिससे भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों को बेहतर बनाया जा सकेगा।

मेडिकल छात्रों को भी होगा लाभ

एमजीएम एक मेडिकल कॉलेज होने के कारण यहां पढ़ने वाले छात्रों को इस सिस्टम से वास्तविक केस स्टडी का डेटा मिलेगा। इससे उन्हें बीमारियों के पैटर्न और इलाज की बारीकियों को समझने में मदद मिलेगी।अस्पताल अधीक्षक डॉ. बलराम झा के अनुसार, इस पहल से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि इलाज की गुणवत्ता में भी सुधार होगा और डॉक्टरों व मरीजों दोनों के हित सुरक्षित रहेंगे।

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