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RANCHI Pahari Mandir : हिमालय से पुरानी है यह पहाड़ी, जहां बसते हैं भोलेनाथ

Jharkhand Hindi News : पहाड़ी को बचाने की अपील, 20 साल से स्टडी करने वाले पर्यावरणविद बोले, संरक्षित नहीं किया तो इतिहास बन जाएगा ये फॉसिल पहाड़

by Vivek Sharma
RANCHI Pahari Mandir
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RANCHI: पहाड़ी मंदिर झारखंड की राजधानी रांची में पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। यह मंदिर शिव को समर्पित है। यह समुद्र तल से 2140 फीट और जमीन से 350 फीट ऊपर स्थित है। पहाड़ी मंदिर में शिवलिंग की पूजा की जाती है। शिवरात्रि और सावन के महीनों में यहां शिव भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। लेकिन इस पहाड़ी पर अब संकट मंडरा रहा है। ये हम नहीं बल्कि 20 सालों से पहाड़ी की स्टडी करने वाली जियोलॉजिस्ट डॉ नीतिश प्रियदर्शी कह रहे हैं। वह बताते है कि हिमालय से पुराने इस पहाड़ी को बचाने की जरूरत है। अब भी इसे बचाने पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसका नामो निशान मिट जाएगा और इतिहास में दर्ज हो जाएगा।

2016 में की थी छेड़छाड़ नहीं करने की अपील

2016 में एक रिपोर्ट डॉ नीतिश प्रियदर्शी ने दी थी। जिसमें उन्होंने पहाड़ी के साथ छेड़छाड़ नहीं करने की अपील की थी। इसके बावजूद पहाड़ी पर छेड़छाड़ जारी है। वहीं देश का सबसे ऊंचा तिरंगा फहराने के लिए लगाया गया खंभा भी आजतक वैसे ही खड़ा है। इसपर न तो तिरंगा फहरा रहा है और न ही प्रशासन खंभे को हटाने को लेकर कोई कदम उठा रहा है। जिससे साफ है कि ये खंभा कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।

980 से 1200 मीलियन वर्ष पुराना फॉसिल पहाड़

डॉ नीतिश ने बताया कि ये पहाड़ हिमालय से भी पुराना है। इस फॉसिल पहाड़ को बचाकर रखने की जरूरत है। रांची में आसपास बरियातू पहाड़, टैगोर हिल, जगन्नाथपुर पहाड़ इस पहाड़ी से काफी नए है। ये प्राचीनतम पहाड़ 980 से 1200 मीलियन वर्ष पुराना है। इस तरह की चट्टान केवल भारत में पाई जाती है। उन्होंने कहा कि इस पहाड़ पर स्टडी करने के लिए अंग्रेज 100 साल पहले आते थे। पहाड़ी में खंडालाइट चट्टान है। चट्टानों में कैल्शियम और सोडियम भी पाए जाते है। ऐसी मान्यता है कि कोणार्क का सूर्य मंदिर भी ऐसी ही चट्टान से बना है।

अंग्रेजों के कब्जे में थी पहाड़ी

पर्वत पर स्थित यह शिव मंदिर देश की स्वतंत्रता से पहले अंग्रेजों के कब्जे में था और वे यहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी देते थे। भारत के आजाद होने के बाद से स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर इस मंदिर में राष्ट्रीय ध्वज के साथ-साथ धार्मिक ध्वज भी फहराए जाते हैं। यह देश का पहला मंदिर है जहां तिरंगा फहराया जाता है। रांची रेलवे स्टेशन से 7 किलोमीटर दूर स्थित यह शिव मंदिर पहाड़ी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।

पहाड़ी बाबा मंदिर का पुराना नाम तिरिबुरु था, जो ब्रिटिश काल में बदलकर ‘हैंगिंग गैरी’ हो गया, क्योंकि ब्रिटिश राज के दौरान यहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी। आजादी के बाद रांची में पहला तिरंगा झंडा फहराया गया था, जिसे रांची के स्वतंत्रता सेनानी केसी दास ने फहराया था। उन्होंने यहां शहीद हुए स्वतंत्रता सेनानियों की याद और सम्मान में तिरंगा फहराया था। तब से हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर यहां तिरंगा फहराया जाता है। पहाड़ी मंदिर में एक शिलाखंड है, जिस पर 14 और 15 अगस्त 1947 के देश की आजादी का संदेश अंकित है।

पहाड़ी मंदिर विकास संघर्ष समिति

पहाड़ी को बचाने के लिए पहाड़ी मंदिर विकास संघर्ष समिति भी सक्रियता से जुटी है। कई सालों से समिति के लोग पौधारोपण करते रहे है। पिछले साल समिति ने पहाड़ी के ढलान पर 1000 पौधे लगाए थे। जिसमें से 600 तो अब वृक्ष का रूप ले लिया है। ये पहाड़ी को दरकने से रोकने में मदद करेंगे। इस साल भी समिति की हरियाली मार्च निकालने की योजना है। जिसमें मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं से एक पौधा लाने की अपील की जाएगी। ये पौधे पहाड़ी के चारों ओर लगाए जाएंगे।

गार्ड वाल की बढ़ाई जा रही ऊंचाई

पहाड़ी मंदिर के चारो ओर गार्डवाल का निर्माण कराया गया था। अब इस गार्ड वाल की ऊंचाई बढ़ाई जा रही है। पर्यटन विभाग की निगरानी में इस कार्य को कराया जा रहा है वही पुराने मंदिर के मुख्य द्वार और आसपास में भी ब्यूटीफिकेशन का कार्य जारी है। हालांकि इसे लेकर भी एक्सपर्ट्स ने चिंता जताई है। चूंकि पहाड़ी का कटाव भी हो रहा है। इस वजह से पेड़ों की जड़ भी कमजोर पड़ रही है। अब वहां पर ज्यादा से ज्यादा घास लगाने की अपील की गई है, जिससे कि मिट्टी का कटाव रोका जा सके।

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FAQ (Frequently Asked Questions)

Q.1. रांची का पहाड़ी मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?

रांची का पहाड़ी मंदिर भगवान शिव को समर्पित प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह मंदिर ऊंची पहाड़ी पर स्थित होने के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र माना जाता है। यहां सावन और महाशिवरात्रि में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।

Q.2 पहाड़ी मंदिर की पहाड़ी कितनी पुरानी मानी जाती है?

जियोलॉजिस्ट डॉ. नीतिश प्रियदर्शी के अनुसार यह पहाड़ी लगभग 980 से 1200 मिलियन वर्ष पुरानी फॉसिल संरचना है, जिसे हिमालय से भी अधिक प्राचीन बताया गया है।

Q.3. पहाड़ी मंदिर का स्वतंत्रता संग्राम से क्या संबंध है?

ब्रिटिश शासनकाल में इस पहाड़ी का उपयोग स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी देने के लिए किया जाता था। आजादी के बाद यहां पहला तिरंगा फहराया गया और तब से हर स्वतंत्रता दिवस तथा गणतंत्र दिवस पर यहां राष्ट्रीय ध्वज फहराने की परंपरा जारी है।

Q.4. पहाड़ी मंदिर में कौन-सी विशेष चट्टान पाई जाती है?

यहां खंडालाइट चट्टान पाई जाती है, जिसे भूगर्भीय दृष्टि से बेहद दुर्लभ माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार की चट्टान भारत के चुनिंदा क्षेत्रों में ही मिलती है।

Q.5. पहाड़ी मंदिर की पहाड़ी पर खतरा क्यों बताया जा रहा है?

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार निर्माण कार्य, कटाव और प्राकृतिक संरचना के साथ छेड़छाड़ के कारण पहाड़ी कमजोर हो रही है। समय रहते संरक्षण नहीं किया गया तो इसका भूगर्भीय स्वरूप प्रभावित हो सकता है।

Q.6. पहाड़ी मंदिर को बचाने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?

पहाड़ी मंदिर विकास संघर्ष समिति द्वारा पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है। मिट्टी के कटाव को रोकने और पहाड़ी को सुरक्षित रखने के लिए हरियाली बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

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