Ranchi : केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त करने की औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है। ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा इस संबंध में राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित कर दी गई है। इसके अनुसार अनुसार 1 जुलाई 2026 से देशभर में “विकसित भारत- रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी” योजना लागू होगी। इसके साथ ही मनरेगा अधिनियम, 2005 और इसके अंतर्गत संचालित सभी नियम, योजनाएं, आदेश और दिशा-निर्देश स्वतः समाप्त माने जाएंगे।
2006 में लागू हुआ था मनरेगा
मनरेगा देशभर में 2 फरवरी 2006 से लागू हुआ था। शुरुआत में इसे 200 पिछड़े जिलों में लागू किया गया था, जबकि 1 अप्रैल 2008 से यह पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी हो गया। इस कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को हर वर्ष 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाती थी। करीब दो दशक तक यह मनरेगा ग्रामीण गरीबों और मजदूर परिवारों की आजीविका का बड़ा सहारा बना रहा।
नई योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार कौशल विकास को बढ़ावा
केंद्र सरकार ने “वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025” की धारा 37 की उपधारा (1) के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। अधिसूचना के अनुसार नई योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, कौशल विकास, परिसंपत्ति निर्माण और आजीविका आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक तकनीक आधारित और परिणाम केंद्रित होगी।
सूत्रों के अनुसार नई योजना में रोजगार की अवधि 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन तक करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर कृषि, जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत संरचना और सामुदायिक परिसंपत्तियों से जुड़े कार्यों में रोजगार दिया जाएगा।
झारखंड में लाखों परिवारों पर पड़ेगा असर
झारखंड में मनरेगा ग्रामीण रोजगार की सबसे बड़ी योजनाओं में शामिल रही है। राज्य के गांवों में तालाब, डोभा, कच्ची सड़क, सिंचाई कूप, जल संरक्षण और भूमि विकास जैसी हजारों योजनाएं मनरेगा से संचालित होती रही हैं। कोरोना काल में गांव लौटे प्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने में भी इस योजना की अहम भूमिका रही थी।

