Home » Varanasi Kolkata Expressway : जमीन की अड़चन में फंसा वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेस-वे, एक ही सेक्शन में शुरू हो पाया है काम

Varanasi Kolkata Expressway : जमीन की अड़चन में फंसा वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेस-वे, एक ही सेक्शन में शुरू हो पाया है काम

by Nikhil Kumar
Varanasi Kolkata Expressway
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

रांची : भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे वाराणसी- कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का काम झारखंड में जमीन अधिग्रहण और वन भूमि क्लियरेंस की वजह से धीमी गति से चल रहा है। राज्य में बनने वाले 202 किलोमीटर हिस्से के लिए कुल छह पैकेज तय किये गये हैं, लेकिन अब तक केवल एक पैकेज में ही निर्माण कार्य शुरू हो पाया है। बाकी पांच सेक्शन में जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण काम अटका हुआ है। करीब 610 किलोमीटर लंबा यह सिक्सलेन एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के चंदौली से पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा तक बनाया जाना है। झारखंड में यह सड़क चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, रांची और बोकारो जिले से होकर गुजरेगी। राज्य में पैकेज संख्या 8 से 13 तक निर्माण होना है।


एनएचएआई सूत्रों के अनुसार, पैकेज-8 चतरा, पैकेज-9 हजारीबाग, पैकेज-10 रामगढ़, पैकेज-11 रांची तथा पैकेज-12 और 13 बोकारो जिले में प्रस्तावित हैं। इनमें से सिर्फ बोकारो के अंतिम सेक्शन में निर्माण कार्य शुरू हो पाया है। यहां मिट्टी भराई और सड़क का बेस तैयार करने का काम चल रहा है, जबकि बाकी पांच सेक्शन भूमि विवाद और अधिग्रहण प्रक्रिया में फंसे हैं।


हजारीबाग और रामगढ़ सेक्शन में वन भूमि सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। कई हिस्सों में जंगल क्षेत्र पड़ने के कारण वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है। वहीं चतरा और रांची क्षेत्र में रैयती जमीन अधिग्रहण और मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया धीमी बतायी जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, इस परियोजना के लिए टेंडर वर्ष 2023 में ही फाइनल कर दिए गए थे और एजेंसियों को वर्कऑर्डर भी जारी कर दिया गया था। बावजूद इसके तीन साल बाद भी जमीन उपलब्ध नहीं होने से अधिकांश हिस्सों में मशीनें नहीं उतर सकी हैं। एनएचएआई के चेयरमैन स्तर से भी राज्य सरकार और संबंधित जिलों को कई बार पत्र भेजे गए हैं।


अधिकारियों का कहना है कि जमीन मिलते ही बाकी सेक्शन में भी तेजी से निर्माण शुरू कराया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद झारखंड के औद्योगिक और खनन क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलेगा। माल ढुलाई तेज होगी और रांची, रामगढ़ व बोकारो जैसे क्षेत्रों की कनेक्टिविटी सीधे उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल से मजबूत होगी। एनएचएआई ने इस एक्सप्रेस-वे को वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन फिलहाल लंबित पांच सेक्शन के कारण परियोजना की रफ्तार पर बड़ा असर पड़ रहा है।

Read Also- Jharkhand SIR : SIR पर JMM का चुनाव आयोग को संदेश, कहा- झारखंड का राजनीतिक मिजाज अलग

Related Articles

Leave a Comment