
रांची : विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 को लेकर राज्य में फैल रही विभिन्न चर्चाओं और आशंकाओं के बीच मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की जो बातें कही जा रही हैं, ये भ्रामक हैं। केवल निर्धारित नियमों के तहत पांच विशेष श्रेणियों में आने वाले मतदाताओं के नाम ही पांच अगस्त 2026 को प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं किए जाएंगे। इन सभी मामलों की अलग सूची प्रकाशित की जाएगी और संबंधित व्यक्ति को दावा एवं आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अवसर मिलेगा।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि मतदाता के रूप में पंजीकरण करना प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक का संवैधानिक और कानूनी अधिकार है। संविधान के अनुच्छेद 326 तथा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत यह अधिकार सुनिश्चित किया गया है। इसलिए किसी भी पात्र भारतीय नागरिक को मतदाता सूची से बाहर करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। निर्वाचन आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।
उन्होंने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण की यह प्रक्रिया झारखंड में करीब 23 वर्षों के बाद आयोजित की जा रही है। इसके तहत वर्तमान मतदाता सूची में शामिल सभी मतदाताओं को गणना प्रपत्र उपलब्ध कराया जाएगा। जो मतदाता निर्धारित अवधि के भीतर हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र जमा करेंगे, उनका नाम बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज की मांग के प्रारूप मतदाता सूची में शामिल कर लिया जाएगा।
एक से अधिक मतदान केंद्रों पर नहीं दर्ज रह सकता नाम
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि प्रारूप मतदाता सूची में पांच श्रेणी के मतदाताओं के नाम शामिल नहीं किए जाएंगे। पहली श्रेणी ऐसे मतदाताओं की है, जिनका नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है। यदि किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक विधानसभा क्षेत्रों अथवा एक ही विधानसभा क्षेत्र के कई मतदान केंद्रों पर दर्ज है, तो उसे केवल अपने सामान्य निवास वाले मतदान केंद्र पर ही पंजीकृत रहने की अनुमति होगी।
दूसरी श्रेणी मृत मतदाताओं की है। मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध बनाए रखने के लिए जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं किए जाएंगे। परिवार के सदस्य इसकी सूचना संबंधित मतदान अधिकारी को दे सकेंगे।
तीसरी श्रेणी ऐसे मतदाताओं की है, जो रोजगार, विवाह अथवा अन्य किसी कारण से स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके हैं और पुराने मतदान केंद्र पर उनका नाम अब भी दर्ज है। ऐसे मतदाताओं का नाम पुराने मतदान केंद्र की सूची से हटाकर उनके नए निवास स्थान के अनुसार पंजीकृत किया जाएगा।
चौथी श्रेणी अनुपस्थित अथवा अप्राप्य मतदाताओं की है। ऐसे मतदाता जिनके बारे में स्थानीय स्तर पर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है, जो लंबे समय से क्षेत्र में नहीं रह रहे हैं और जिनका पता सत्यापन के दौरान नहीं चल पाता है, उनके नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं किए जाएंगे।
विदेशी नागरिक को मतदाता सूची में बनाए रखने का कोई प्रावधान नहीं
पांचवीं श्रेणी ऐसे लोगों की है, जो गणना प्रपत्र पर हस्ताक्षर करने से इंकार करते हैं अथवा विदेशी नागरिक हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि केवल भारतीय नागरिक ही मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के पात्र हैं। यदि कोई विदेशी नागरिक किसी कारणवश मतदाता सूची में शामिल हो गया है, तो उसे सूची में बनाए रखने का कोई प्रावधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि इन पांचों श्रेणियों से संबंधित मामलों की अलग सूची तैयार की जाएगी, जिसे सार्वजनिक किया जाएगा। यह सूची सभी मतदान केंद्रों, पंचायत भवनों और शहरी निकायों के कार्यालयों में उपलब्ध रहेगी। साथ ही इसे जिला निर्वाचन पदाधिकारियों तथा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की वेबसाइट पर भी प्रकाशित किया जाएगा, ताकि कोई भी नागरिक इसकी जांच कर सके।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक चलने वाले गणना चरण में सभी मौजूदा मतदाताओं के लिए हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र जमा करना आवश्यक होगा। वहीं पांच अगस्त से चार सितंबर 2026 तक दावा एवं आपत्ति की अवधि रहेगी, जिसमें कोई भी पात्र नागरिक अपना नाम जुड़वाने, सुधार कराने अथवा किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज करा सकेगा।
उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य किसी पात्र नागरिक का नाम हटाना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है। निर्वाचन प्रक्रिया की पूरी कवायद इसी उद्देश्य के साथ की जा रही है कि राज्य की मतदाता सूची पूरी तरह अद्यतन और त्रुटिरहित हो।

