
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर (पुरानीबस्ती) में संजय नदी पर बन रहे बलिया घाट पुल के निर्माण कार्य पर विवादों के बादल मंडराने लगे हैं। लगभग पूरी तरह तैयार हो चुके इस पुल की निर्माण गुणवत्ता को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या-1 के पार्षद स्वपन कुमार मिस्त्री ने निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

4.07 करोड़ की लागत से बन रहा है पुल
ग्रामीण विकास विभाग (विशेष प्रमंडल) द्वारा करीब 4.07 करोड़ रुपये की लागत से 97 मीटर लंबा यह पुल बनाया जा रहा है। यह पुल क्षेत्र के लिए किसी ‘लाइफलाइन’ से कम नहीं है, क्योंकि इसके शुरू होने से गोईलकेरा, सोनुवा और चक्रधरपुर प्रखंड के हजारों लोगों को आवागमन में बहुत बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
बालू की जगह ‘स्टोन डस्ट’ के इस्तेमाल का आरोप
पार्षद स्वपन कुमार मिस्त्री ने ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल, चाईबासा के कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) को एक आधिकारिक पत्र सौंपकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र के अनुसार पुल की रिटर्निंग वॉल (सुरक्षा दीवार) की ढलाई में तय मानकों और गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले बालू (रेत) की जगह शत-प्रतिशत स्टोन डस्ट (पत्थर के चूरे) का इस्तेमाल किया जा रहा है। पार्षद का कहना है कि इस लापरवाही के कारण पुल की मजबूती और गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे भविष्य में कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है और आम जनता की जान जोखिम में पड़ सकती है।
जांच न होने तक पुल निर्माण कार्य पर रोक
जब तक पूरे मामले की सही से जांच नहीं हो जाती, तब तक पुल के निर्माण कार्य को तुरंत प्रभाव से रोका जाए। इसके लिए अब तक पुल में जितने भी ढलाई के कार्य हुए हैं, उन सभी की किसी स्वतंत्र (Independent) जांच एजेंसी से तकनीकी जांच कराई जाए। यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है, तो स्टोन डस्ट से की गई घटिया ढलाई को पूरी तरह से तोड़कर, मानकों के अनुसार दोबारा निर्माण कराया जाए।
विभाग की चुप्पी और लोगों में असमंजस
पुल की गुणवत्ता पर इतने गंभीर आरोप लगने के बाद भी ग्रामीण विकास विभाग की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इस पुल का इंतजार क्षेत्र के हजारों ग्रामीण लंबे समय से कर रहे हैं, ऐसे में निर्माण पर उठे इन सवालों के बाद अब स्थानीय लोगों की निगाहें विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

