
चतरा : जिले का कौलेश्वरी पर्वत राज्य में अपनी एक अलग और खास पहचान रखता है। हंटरगंज प्रखंड में स्थित यह पर्वत केवल एक प्राकृतिक स्थल नहीं है। यह तीन प्रमुख धर्मों सनातन, जैन और बौद्ध का एक पवित्र और बड़ा संगम स्थल है। यहां साल भर श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। देश ही नहीं, बल्कि विदेश से भी लोग यहां की सुंदरता और आस्था को देखने-समझने के लिए पहुंचते हैं।
झारखंड के दिवंगत पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू इस पर्वत को एक बड़ा पर्यटन केंद्र बनाना चाहते थे। कौलेश्वरी पर्वत पर रोपवे का निर्माण उनका सबसे पसंदीदा और ड्रीम प्रोजेक्ट था। वे चाहते थे कि वृद्ध, बच्चे और श्रद्धालु आसानी से पहाड़ की चोटी तक पहुंच सकें। वे अपने ही कार्यकाल में इस बड़ी योजना की नींव रखना चाहते थे।
उन्होंने अधिकारियों को सभी कागजी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं जल्द पूरी करने के सख्त निर्देश दे रखा था। वे खुद चतरा आकर इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास करने वाले थे। लेकिन शिलान्यास की तारीख तय होने से पहले ही उनका अचानक निधन हो गया। उनके निधन की खबर से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में गहरी मायूसी और शोक छा गया।
सर्वे कार्य में जुटी विशेष तकनीकी टीम
मंत्री भले ही हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनका शुरू कराया गया काम अब भी जारी है। मंत्री के निर्देशों के तहत राइट्स लिमिटेड की एक विशेष तकनीकी टीम चतरा पहुंच चुकी है। टीम पिछले चार दिनों से कौलेश्वरी पर्वत पर ही डेरा डाले हुए है।
अभियंता रंजन माधव के नेतृत्व में यह तकनीकी टीम दिन-रात काम कर रही है। टीम रोपवे के लिए सही जगह का चुनाव कर रही है। इसके तहत रोपवे का मुख्य प्लेटफॉर्म, पर्यटकों के लिए गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट बनाने वाली जगहों का निरीक्षण किया जा रहा है। इसके साथ ही पहाड़ की नींव और मिट्टी जांचने के लिए सैंपलिंग का काम चल रहा है।
अभियंता रंजन माधव के मुताबिक मंत्री सुदिव्य कुमार इस योजना को लेकर बेहद गंभीर थे। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि निर्माण कार्य में किसी भी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।
कौलेश्वरी पर्वत पर रोपवे बनने से चतरा जिले में पर्यटन का एक नया अध्याय शुरू होगा। बुजुर्ग और बीमार श्रद्धालुओं के लिए पहाड़ पर चढ़ना बेहद आसान हो जाएगा। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और व्यापार में भी बढ़ोतरी होगी। अब स्वर्गीय मंत्री के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारना अब राज्य सरकार और पर्यटन विभाग के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी और चुनौती बन गया है।
Read Also: Vedapureeswarar Temple : 1003 ईस्वी की ऐतिहासिक गवाही, तमिलनाडु के मंदिर में मिला राजाराज चोल के दौर का अनमोल शिलालेख

